Ulcerative Colitis in Hindi: अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण, लक्षण, ईलाज और आहार की जानकारी

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अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) यह आंत का एक Inflammatory Bowel Disease (IBD) रोग जैसा दीर्घकालिक रोग हैं। यह एक ऐसा रोग है जिसे पूरी तरह से ठीक कर पाना बेहद मुश्किल हैं। समय पर ईलाज, आहार में बदलाव, व्यायाम और योग की मदद से आप इस रोग को काबू में रख सकते हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस क्या हैं? (What is Ulcerative Colitis in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस यह बड़ी आंत (Large Intestine or Colon) और मलाशय (Rectum) का रोग है जिसमे आंत के परत में सूजन (inflammation), जलन (irritation) और अल्सर (Ulcer) निर्माण हो जाते हैं। यह Inflammatory Bowel Disease का सबसे सामान्य रोग में से एक हैं।

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इस रोग की शुरुआत धीरे-धीरे होती है और उपचार न करने पर रोग बढ़ जाता हैं। कई लोगों में कुछ हफ़्तों से लेकर महीनो तक कोई लक्षण नजर नहीं आता हैं जिसे रोग का remission period कहा जाता हैं। हर रोगी में इस रोग की तीव्रता भिन्न हो सकती हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के क्या कारण हैं? (What are causes of Ulcerative Colitis in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस का कोई ठोस कारण का अभी तक पता नहीं चला है। हालाँकि विशेषज्ञ का मानना है की नीचे दिए हुए कारणों से अल्सरेटिव कोलाइटिस होने की संभावना अधिक हैं।

रोग प्रतिरोधक शक्ति में गड़बड़ी (Immunity)

रोग प्रतिरोधक शक्ति में गड़बड़ी यह अल्सरेटिव कोलाइटिस होने का एक बड़ा कारण माना जाता हैं। आमतौर पर रोग प्रतिरोधक शक्ति का काम विषैले पदार्थ, वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ काम करना होता है पर कुछ गड़बड़ी आने पर यह भोजन, पेट के अच्छे बैक्टीरिया (Gut Bacteria) और आंत के परत की कोशिकाओं को घुसपैठिया समझकर उन पर हमला कर देती है जिस कारण बड़ी आंत में सूजन और अल्सर निर्माण हो जाते हैं।

अनुवांशिकता (Genetic)

अल्सरेटिव कोलाइटिस यह जेनेटिक रोग नहीं है पर अगर आपके परिवार में किसी सेज संबंधी जैसे माता-पिता या भाई-बहन को यह रोग है तो आपको यह रोग होने का खतरा बढ़ जाता हैं।

उम्र (Age)

अल्सरेटिव कोलाइटिस होने का जोखिम 15 से 30 वर्ष के आयु में या 60 वर्ष से अधिक आयु में होने का खतरा अधिक हैं।

पर्यावरण (Environmental)

कुछ विशेषज्ञों के हिसाब से आहार, प्रदूषण और तनाव जैसे कुछ पर्यावरणीय कारक रोग की शुरुआत में भूमिका निभा सकते हैं।

जातीयता (Ethnicity)

Ashkenazi यहूदी मूल के लोगो में Ulcerative Colitis के रोगी अधिक पाए जाते हैं।

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अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण क्या हैं? (What are symptoms of Ulcerative Colitis in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण हर रोगी में तीव्रता अनुसार भिन्न हो सकते हैं और यह हल्के से लेकर अत्यधिक गंभीर रूप धारण करते हैं। कुछ प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • रक्तस्रावी दस्त (Bloody diarrhea): अल्सरेटिव कोलाइटिस का सबसे आम लक्षण है जिसमे रोगी को दस्त के साथ में खून भी निकल जाता हैं। आंत में अल्सर होने के कारण ब्लीडिंग होती है और दस्त के साथ खून निकलने लगता हैं।
  • पेट दर्द और मरोड़ (Abdominal pain and cramps): रोगी को पेट के निचले हिस्से में नाभि के निचे दर्द होता है और पेट में मरोड़ आकर दस्त भी लगते हैं।
  • बार-बार मल त्याग की तीव्र इच्छा (Frequent and urgent bowel movements): रोगी को बार-बार मलत्याग करने के इच्छा होती हैं। एक बार में पेट अच्छे से साफ़ नहीं होता हैं और कुछ भी खाने के बाद रोगी को मलत्याग की इच्छा होने लगती हैं।
  • थकान (Fatigue): आंतों की सूजन शारीरिक ऊर्जा के स्तर को कम कर सकती है। खाने का ठीक से पाचन नहीं होना, रक्तस्त्राव और पोषण की कमी से रोगी को कमजोरी और थकन आने लगती हैं।
  • वजन कम होना (Unintentional weight loss): भूक की कमी, अपचन के कारण पोषण में कमी आने से रोगी का वजन कम होने लगता हैं।
  • ज्वर (Fever): आंत में संक्रमण होने से रोगी को तेज बुखार आने लगता हैं।
  • खून की कमी (Anemia): दस्त में रक्तस्त्राव होने से और पोषक पदार्थो की कमी से शरीर में खून की कमी होने लगती हैं।

कुछ रोगियों में अल्सरेटिव कोलाइटिस से जुड़े अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे की:

  • जोड़ों में दर्द और सूजन (Joint pain and arthritis)
  • आँखों में सूजन (Eye inflammation)
  • त्वचा विकार (Skin problems)
  • लिवर संबंधी समस्याएं (Liver complications)

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अल्सरेटिव कोलाइटिस के कितने प्रकार हैं? (Types of Ulcerative Colitis in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस के स्थान के हिसाब से इसके कुछ प्रकार किये गए है जिनकी जानकारी नीचे दी गयी हैं:

  1. अल्सरेटिव प्रोक्टाइटिस (Ulcerative proctitis): आमतौर पर सबसे हल्का रूप होता है। यह केवल मलाशय (rectum) में होता है, जो मलद्वार (anus) के सबसे निकट बड़ी आंत का हिस्सा है। रक्तयुक्त (bleeding) मल त्याग इस रोग का एकमात्र लक्षण हो सकता है।
  2. प्रोक्टोसिग्मॉइडाइटिस (Proctosigmoiditis): आपके मलाशय (rectum) और बड़ी आंत के निचले हिस्से (sigmoid colon) में पाया जाता है। आपको रक्तयुक्त दस्त, पेट में ऐंठन, और दर्द होगा। मल त्याग करने की लगातार इच्छा महसूस करेंगे, लेकिन शायद मल त्याग नहीं कर पाएंगे।
  3. बायीं तरफ का कोलाइटिस (Left-sided colitis): आपके पेट के बायीं ओर ऐंठन का कारण बनता है। आपको रक्तयुक्त दस्त भी होंगे और आपका वजन भी बिना कोशिश के कम हो सकता है। आपको मलाशय से लेकर बायीं तरफ के बड़ी आंत तक सूजन होगी।
  4. पैनकोलाइटिस (Pancolitis): अक्सर आपके पूरे बड़ी आंत को प्रभावित करता है। यह आपके पेट में गंभीर ऐंठन, रक्तयुक्त दस्त, दर्द, थकान और अत्यधिक वजन घटने जैसी परेशानियां पैदा कर सकता है।
  5. एक्यूट सीवियर अल्सरेटिव कोलाइटिस (Acute severe ulcerative colitis): यह रोग दुर्लभ है। यह आपके पूरे बड़ी आंत को प्रभावित करता है और गंभीर दर्द, भारी दस्त, रक्तस्त्राव और बुखार का कारण बनता है।

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अल्सरेटिव कोलाइटिस का निदान कैसे किया जाता हैं? (Diagnosis of Ulcerative Colitis in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस (UC) का निदान रोगी के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और विविध जांच के आधार पर किया जाता हैं

  • रोगी इतिहास और लक्षण (Symptoms): डॉक्टर आपको सवाल पूछकर आपके लक्षणों, उनकी गंभीरता, कब शुरू हुए, और वे किससे बेहतर या बदतर होते हैं, के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते है।
  • चिकित्सा इतिहास (Medical History): डॉक्टर आपको पहले से अभी कोई बीमारी, दवाओं के उपयोग, और पारिवारिक चिकित्सा इतिहास के बारे में पूछते है।
  • शारीरिक परीक्षण (Physical Examination): डॉक्टर आपके पेट की जांच कर पेट में दर्द या सूजन की जांच करते हैं।
  • मल परीक्षण (Stool Microscopic Examination): मल में रक्त, सफेद रक्त कोशिकाएं, या परजीवी की उपस्थिति का पता लगाने के लिए मल परीक्षण किए जाते हैं।
  • खून जांच (Blood Test): डॉक्टर शरीर में कोई संक्रमण या खून की कमी है या नहीं यह देखने के लिए CBC, CRP, ESR, SGPT, S.CREATININE आदि जांच करा सकते हैं।
  • इमेजिंग अध्ययन (Imaging): एक्स-रे, सीटी स्कैन, या एमआरआई जैसी इमेजिंग तकनीकों का उपयोग बड़ी आंत और छोटी आंत में सूजन या असामान्यताओं की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।
  • एंडोस्कोपी (Endoscopy): एंडोस्कोपी एक महत्वपूर्ण जांच है जिसमे कैमरा लगे नली को मुंह या गुड़ भाग से अंदर डालकर आंत की जांच की जाती हैं।

एंडोस्कोपी के प्रकार

  • कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy): इस प्रक्रिया में, एक लचीली ट्यूब (कोलोनोस्कोप) को गुदा के माध्यम से बड़ी आंत में डाला जाता है, जो बड़ी आंत की अंदर से जांच करने और Biopsy के लिए आंत के नमूने लेने के लिए उपयोगी हैं। बायोप्सी जांच से कैंसर है या नहीं यह निदान करने में आसानी होती हैं।
  • सिग्मायोडोस्कोपी (Sigmoidiscopy): यह कोलोनोस्कोपी का एक प्रकार है जो केवल बड़ी आंत का निचला हिस्सा जिसे सिग्मोइड कहते है उसकी जांच करता है।
  • ऊपरी एंडोस्कोपी (Upper GI Endoscopy): यह प्रक्रिया अन्नप्रणाली, पेट और छोटी आंत की जांच के लिए करती है, जो क्रोहन रोग (Crohns Disease) जैसी अन्य रोग के निदान में उपयोगी हैं।
  • मल कैलप्रोटेक्टिन परीक्षण: यह परीक्षण मल में कैलप्रोटेक्टिन नामक प्रोटीन की मात्रा को मापता है, जो सूजन का एक मार्कर है।

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अल्सरेटिव कोलाइटिस का ईलाज कैसे किया जाता हैं? (Treatment of Ulcerative Colitis in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस का कोई रामबाण ईलाज नहीं है जो इसे जड़ से ख़त्म कर सकता हैं। ईलाज का उद्देश्य आंत में सूजन को कम करना और रोगी लम्बे समय तक दर्द रहित जीवन जिए यह होता हैं। Ulcerative Colitis के treatment की अधिक जानकारी नीचे दी गयी हैं।

दर्दनाशक दवा – Use of Pain Killers for Treatment of Ulcerative Colitis

अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी को पेट में दर्द, मरोड़ और सूजन की शिकायत अधिक होती हैं। दर्द नाशक दवा से यह लक्षण कम हो जाते हैं। पेट दर्द कम करने के लिए Mefenamic acid, Dicyclomine, Drotavarine, Paracetamol, Tramadol आदि दवा का उपयोग किया जाता हैं।

एंटासिड दवा – Use of Antacids for Treatment of Ulcerative Colitis

अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी को एसिडिटी की समस्या अधिक हो जाती है। अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी को ईलाज के लिए जो दवा देते है उनसे भी एसिडिटी बढ़ जाती हैं। एसिडिटी और जी मचलाना की समस्या को कम करने के लिए डॉक्टर Pantaprazole, Rabeprazole, Domperidone, Ondansetron, Simethicone, Magaldrate, Oxetacaine आदि दवा का उपयोग करते हैं।

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एंटीबायोटिक दवा – Use of Antibiotics for Treatment of Ulcerative Colitis

अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी को कई बार पेट में इन्फेक्शन हो जाता है इसलिए डॉक्टर Cefixime, Ofloxacin, Ceftriaxone, Cefeperazone, Meropenam आदि एंटीबायोटिक दवा के साथ Ornidazole, Metronidazole दवा भी देते हैं।

सुजनविरोधी दवा – Use of Anti Inflammatory drugs for Treatment of Ulcerative Colitis

अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी के आंत में सूजन कम करने के लिए अमीनोसैलिसिलेट्स (aminosalicylates) दवा का उपयोग किया जाता हैं। Mesalamine (Asacol HD, Lialda), Sulfasalazine (Azulfidine), Balsalazide (Colazal), Olsalazine (Dipentum) यह कुछ 5-aminosalicylates (5-ASA drugs) के उदहारण है।

स्टेरॉयड दवा – Use of Steroids drugs for Treatment of Ulcerative Colitis

जैसा की हमने देखा है की अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी की रोग प्रतिरोधक शक्ति अपने ही शरीर के विरोध में काम करती है इसलिए रोग प्रतिरोधक शक्ति को कम करने के लिए कई बार डॉक्टर कुछ समय के लिए Hydrocortisone, Methyl Prednisolone आदि स्टेरॉयड दवा देते हैं। स्टेरॉयड दवा से सूजन भी कम होती हैं।

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जैविक दवा – Use of Biologics drugs for Treatment of Ulcerative Colitis

माध्यम से गंभीर अल्सरेटिव कोलाइटिस के ईलाज में बायोलॉजिक्स दवा भी उपयोग किया जाता हैं। यश दवा एंटीबाडीज से तैयार होती है और सूजन में कमी लाती हैं। Adalimumab (Humira), Golimumab (Simponi), Infliximab (Remicade), Ustekinumab (Stelara), और Vedolizumab (Entyvio) यह इसके कुछ उदाहरण है।

शल्य चिकित्सा – Surgery

अगर दवाएं लक्षणों को नियंत्रित करने में विफल रहती हैं या गंभीर जटिलताएं (complications) होती हैं, तो बड़ी आंत को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाने के लिए ऑपरेशन या सर्जरी की जाती हैं। अल्सरेटिव कोलाइटिस के लिए सर्जरी के दो मुख्य प्रकार हैं:

  1. कोलेक्टोमी: इसमें आपके पूरे कोलन को हटा दिया जाता है। इसके बाद आपको एक ileostomy या colostomy की आवश्यकता होगी, जो एक ऐसा पाउच है जो आपके मल को शरीर से बाहर निकालता है।
  2. प्रोक्टोकोलेक्टोमी: इसमें आपके कोलन और मलाशय को हटा दिया जाता है। इसके बाद आपको एक ileostomy की आवश्यकता होगी।

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अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या आहार लेना चाहिए? (Ulcerative Colitis diet in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या खाना चाहिए? (Foods to eat in Ulcerative Colitis in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या खाना चाहिए इसकी जानकारी नीचे दी गयी हैं:

  • ओमेगा 3 फैटी आहार: विशेषज्ञों के अनुसार अल्सरेटिव कोलाइटिस के रोगी को Omega-3 Fatty acid युक्त आहार खाना चाहिए। अलसी के बीज, चिया सीड, अखरोट, सालमन मछली, अंडे के जर्दी आदि चीजों का आहार में समावेश करना चाहिए।
  • कम फाइबर युक्त आहार: अल्सरेटिव कोलाइटिस में केला, सेब, गाजर, आलू जैसे कम फाइबर युक्त आहार खाना चाहिए।
  • नरम खाद्य पदार्थ: अल्सरेटिव कोलाइटिस में नरम आहार जैसे की सफ़ेद ब्रेड, चावल, पास्ता, ओटमील आदि आहार लेना चाहिए।
  • लीन प्रोटीन: अल्सरेटिव कोलाइटिस में चिकन, अंडा और मछली का सेवन कम प्रमाण में कर सकते हैं।
  • पानी: अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी को दस्त ज्यादा लग सकते है इसलिए पानी की कमी होने से बचने के लिए अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए।
  • भोजन मात्रा: अल्सरेटिव कोलाइटिस में दिन में दो बड़े भोजन लेने की जगह 5 से 6 बार छोटे भोजन करना चाहिए। एक बार में पूरा पेट भरकर खाना नहीं चाहिए।

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अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या नहीं खाना चाहिए? (Foods to avoid in Ulcerative Colitis in Hindi)

अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या नहीं खाना चाहिए इसकी जानकारी नीचे दी गयी हैं:

  • उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ: अल्सरेटिव कोलाइटिस में अह्दिक फाइबर युक्त आहार जैसी की साबुत अनाज, फल, नट्स, बीज, फलियां और सब्जियों की खाल आदि नहीं खाना चाहिए क्योंकि इनसे पेट में भारीपन और गैस होने की संभावना अधिक होती हैं।
  • वसायुक्त और मसालेदार भोजन: अल्सरेटिव कोलाइटिस में अधिक तले हुए भोजन, फास्ट फूड, मसालेदार, मिर्चयुक्त भोजन और रेड मीट का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कैफीन और अल्कोहल: अल्सरेटिव कोलाइटिस में शराब, सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स और कैफीन युक्त पेय इसके लक्षणों को बदतर बना सकते हैं।
  • डेयरी उत्पाद: कुछ लोगों को अल्सरेटिव कोलाइटिस के दौरान डेयरी उत्पादों से पेट में दर्द और गैस अधिक होता हैं।

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अल्सरेटिव कोलाइटिस में कौन से योग करना चाहिए? (Best Yoga in Ulcerative Colitis in Hindi)

कुछ योगासन अल्सरेटिव कोलाइटिस लक्षणों को कम करने, तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

  1. सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar): यह आसन पूरे शरीर को गर्म करता है, पाचन में सुधार करता है और तनाव को कम करता है। शुरुआती लोगों के लिए 4-6 सूर्य नमस्कार और अनुभवी लोगों के लिए 10-12 सूर्य नमस्कार से शुरुआत करें। पढ़े: सूर्यनमस्कार योग की विधि और फ़ायदे
  2. पवनमुक्तासन (Wind Relieving Pose): यह आसन पेट में गैस और सूजन को कम करने में मदद करता है। पढ़े: पवनमुक्तासन की विधि और फ़ायदे
  3. भुजंगासन (Cobra Pose): यह आसन पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है और पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है। पढ़े: भुजंगासन योग की विधि और फ़ायदे
  4. बालासन (Child’s Pose): यह आसन तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।
  5. शवासन (Corpse Pose): यह आसन पूरे शरीर को आराम देता है और तनाव को कम करता है। पढ़े: शवासन योग की विधि और फ़ायदे

अल्सरेटिव कोलाइटिस के दुष्परिणाम क्या हैं? (Complications of Ulcerative Colitis in Hindi)

अगर रोगी अल्सरेटिव कोलाइटिस का समय पर ईलाज नहीं लेता है या इसके लक्षणों को काबू में नहीं रखता है तो रोगी में नीचे दी हुई जटिलताएं निर्माण हो सकती हैं।

  1. गंभीर रक्तस्राव और पानी की कमी (Bleeding & Dehydration): अल्सरेटिव कोलाइटिस के कारण अत्यधिक रक्तस्राव और दस्त हो सकते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी, थकान और चक्कर आना हो सकता है। गंभीर मामलों में, रोगी को खून चढाने या सलाईन चढाने की जरुरत पड़ सकती हैं।
  2. विषाक्त मेगाकोलन (Toxicity): यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर जटिलता है जिसमें बड़ी आंत असामान्य रूप से बड़ा हो जाता है और फूल जाता है। यह पेट दर्द, मतली और उल्टी का कारण बन सकता है। यदि इसका इलाज नहीं किया जाता है, तो यह गंभीर हो सकता है।
  3. छिद्रित कोलन (Perforation): गंभीर सूजन के कारण, बड़ी आंतकी दीवार में छेद हो सकता है, जिससे पेट में संक्रमण हो सकता है। यह तेज पेट दर्द, बुखार और ठंड लगना का कारण बन सकता है। इसके लिए तत्काल चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है।
  4. पेरिटोनिटिस (Peritonitis): यह तब होता है जब पेट की गुहा में सूजन और संक्रमण फैल जाता है। यह तेज पेट दर्द, बुखार और ठंड लगना का कारण बन सकता है। इसके लिए तत्काल ईलाज की आवश्यकता होती है।
  5. यकृत रोग (Liver disease): अल्सरेटिव कोलाइटिस वाले कुछ लोगों को लिवर में सूजन और क्षति का अनुभव हो सकता है।
  6. त्वचा संबंधी जटिलताएं (Skin problms): अल्सरेटिव कोलाइटिस वाले कुछ लोगों को त्वचा पर लालिमा, घाव या जोड़ों में दर्द जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  7. कैंसर का खतरा बढ़ जाना (Colon Cancer): लंबे समय तक अल्सरेटिव कोलाइटिस वाले लोगों में बड़ी आंत का कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  8. वृद्धि और विकास में देरी (Development): यह जटिलता मुख्य रूप से बच्चों में अल्सरेटिव कोलाइटिस से जुड़ी है, जिसके कारण उनका विकास और वृद्धि धीमी हो सकती है।
  9. मनोवैज्ञानिक समस्याएं (Mental Health): Uअल्सरेटिव कोलाइटिस वाले लोग अवसाद, चिंता, तनाव और कम आत्मसम्मान का अनुभव कर सकते हैं।

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क्या कोलाइटिस से जुड़े सवालों के जवाब

क्या कोलाइटिस से कैंसर हो सकता है?

हाँ, अल्सरेटिव कोलाइटिस वाले लोगों में कोलन कैंसर (colon cancer) का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपको अल्सरेटिव कोलाइटिस है और ईलाज नहीं लेते है तो कैंसर होने का खतरा अधिक रहता हैं।

क्या अल्सरेटिव कोलाइटिस पूरी तरह ठीक हो सकती है?

वर्तमान में, अल्सरेटिव कोलाइटिस का कोई रामबाण ईलाज नहीं हैं। सही ईलाज लेकर इसके लक्षणों में कम आ सकती है और रोग कुछ समय के लिए remission में जा सकता हैं। कुछ लोगों को लंबे समय तक छूट मिल सकती है, जिससे उन्हें ऐसा लग सकता है कि उनका अल्सरेटिव कोलाइटिस ठीक हो गया है।

अल्सरेटिव कोलाइटिस की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी के आंत में सूजन कम करने के लिए अमीनोसैलिसिलेट्स (aminosalicylates) दवा का उपयोग किया जाता हैं। यह दवा फ़िलहाल इसके ईलाज के लिए सबसे कारगर मानी जाती हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस में दही खा सकते हैं क्या?

अल्सरेटिव कोलाइटिस वाले लोगों के लिए दही खाना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, खासकर यदि वे प्रोबायोटिक दही चुनते हैं। प्रोबायोटिक दही में जीवित बैक्टीरिया होते हैं जो आंत के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

अल्सरेटिव कोलाइटिस में कितना पानी पीना चाहिए?

अल्सरेटिव कोलाइटिस रोजाना में कम से कम 3 लीटर पानी पीना चाहिए। अगर दस्त ज्यादा लगते है तो अधिक पानी पीना चाहिए। आपको इतना पानी पीना चाहिए की आपकी जीभ कभी सुखी न रहे और पेशाब का रंग हमेशा सफ़ेद रहना चाहिए।

अल्सरेटिव कोलाइटिस में कौन से फल खाने चाहिए?

अल्सरेटिव कोलाइटिस में रोगी को केला, सेब, खरबूजा, अनानस, बेर आदि फल खाना चाहिए। अल्सरेटिव कोलाइटिस में फल को त्वचा निकालकर खाना चाहिए।

अल्सरेटिव कोलाइटिस के लिए सर्जरी की जरूरत कब पड़ती है?

अल्सरेटिव कोलाइटिस (UC) के लिए सर्जरी आमतौर पर अंतिम उपाय के रूप में की जाती है जब अन्य उपचार विफल हो जाते हैं। अधिक ब्लीडिंग होना, आंत में छेद होना, कैंसर का खतरा बढ़ जाना या दवा लेने के बावजूद भी लक्षणों में बिलकुल भी कमी नहीं आने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती हैं।

क्या टमाटर कोलाइटिस के लिए खराब हैं?

अगर टमाटर खाने पर पेट में सूजन या दर्द का अनुभव होता है तो कोलाइटिस में टमाटर नहीं खाना चाहिए। कच्चे टमाटरों में सैलिसिलेट्स नामक एक केमिकल होता है जो कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। पके टमाटरों में सैलिसिलेट्स की मात्रा कम होती है। टमाटर की त्वचा में फाइबर होता है जो कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। यदि आप टमाटर खा रहे हैं, तो त्वचा को निकालना सबसे अच्छा है।

क्या गेहूं अल्सरेटिव कोलाइटिस के लिए खराब है?

गेहू खाने से अल्सरेटिव कोलाइटिस में कुछ लोगों को तकलीफ हो सकती हैं। यदि आपको लगता है कि गेहूं आपके लक्षणों को बदतर बनाता है, तो आप चावल, ज्वार, बाजरा, क्विनोआ या अन्य लस मुक्त अनाज जैसे गेहूं के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

कोलाइटिस के लिए कौन सी रोटी सबसे अच्छी है?

अल्सरेटिव कोलाइटिस वाले लोगों के लिए सबसे अच्छी रोटी वह है जो आसानी से पचने योग्य हो, कम फाइबर वाली हो और सूजन को कम करने में मदद करे। अगर आपको गेहू के रोटी से तकलीफ होती है तो आप जवार, बाजरा या नागली की रोटी विकल्प अपना सकते हैं।

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