Gall Bladder Stones in Hindi: पित्ताशय की पथरी का कारण, लक्षण, ईलाज, योग और आहार

Gall Bladder Stones in Hindi

हमारे शरीर में पेट के भीतर Right side  में Liver के निचे एक छोटीसी थैली होती हैं जिसमे पित्त या Bile जमा होता हैं। इस थैली को ही पित्ताशय की थैली या Gall bladder कहा जाता हैं। कुछ लोगों में इस थैली के अंदर पथरी (stone) का निर्माण हो जाता है जिसे पित्ताशय की पथरी या Gall bladder Stones कहा जाता है।

पित्ताशय की पथरी के कारण पेट में असहनीय दर्द और पाचन से जुडी समस्या निर्माण होती हैं। पित्ताशय की पथरी के अधिकतर मामलों में ऑपरेशन करने की सलाह दी जाती है। कुछ आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार कर भी पित्ताशय की पथरी को गलाया जा सकता हैं।

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Gall bladder Stones होने के कारण, लक्षण, निदान और ईलाज से जुडी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

पित्ताशय की पथरी के कारण क्या हैं ? (Gall bladder Stones causes in Hindi)

Gall bladder Stones निर्माण होने के प्रमुख कारण हैं रक्त में कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण अधिक होना या फिर अधिक समय तक पित्ताशय में पित्त या Bile का पड़ा रहना। पित्ताशय की पथरी के अन्य कारणों की जानकारी निचे दी गयी हैं :

  1. मोटापा (Obesity): अगर आपका वजन अधिक है तो रक्त में कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण अधिक होने के कारण Gall bladder Stones निर्माण हो सकते हैं।
  2. हॉर्मोन (Estrogen): अगर आप गर्भ निरोधक दवा लेते है, अन्य कोई हॉर्मोन की गोली लेते हैं या आप प्रेग्नेंट है तो आपके शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की अधिकता होती हैं। इस हॉर्मोन के कारण भी कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण बढ़ता है और पित्ताशय भी ठीक से खाली न होने से पित्ताशय की पथरी निर्माण होती हैं।
  3. दवा (Medicine): अगर आप रक्त में कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा ले रहे है तो आपके Bile में कोलेस्ट्रॉल की अधिकता हो जाती है जिससे पित्ताशय की पथरी निर्माण हो सकती हैं।
  4. उपवास (Fasting): अगर आप नियमित उपवास करते है तो पित्ताशय खाली नहीं होता है और Bile जमा रहने से Gall bladder Stones तैयार हो जाते हैं। रोजाना समय पर भोजन न करने से भी पित्ताशय की पथरी  निर्माण हो सकते हैं।
  5. अनुवांशिकता (Hereditary): अगर आपके परिवार में किसी व्यक्ति को पित्ताशय की पथरी है तो आपको यह होने की आशंका अधिक रहती हैं।
  6. वजन कम करना (Weight loss): अगर आप तेजी से अपना वजन कम करते है तो लिवर पित्ताशय में अधिक कोलेस्ट्रॉल जमा करता है जिस कारण भी पित्ताशय की पथरी निर्माण होने का खतरा रहता हैं।

इस तरह पित्ताशय की पथरी या तो कोलेस्ट्रॉल की अधिकता से या Bile पित्ताशय में पड़े रहने से मुख्यतः निर्माण होते हैं।

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पित्ताशय की पथरी के कितने प्रकार हैं? (Types of GB Stone in Hindi)

पित्ताशय की पथरी के मुख्य 2 प्रकार हैं :

  1. कोलेस्ट्रॉल की पथरी : Gall bladder Stones के अधिकतर मरीजों में कोलेस्ट्रॉल की पथरी पायी जाती हैं। यह हरे-पिले रंग की पथरी होती हैं।
  2. बिलीरुबिन / पिग्मेंट की पथरी : पित्ताशय में Bile पड़े रहने से Bilirubin जमा होकर छोटी-छोटी पथरी निर्माण होती हैं। इनका रंग गहरा हरा या काला होता हैं।

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पित्ताशय की पथरी के लक्षण क्या हैं ? (Gall bladder Stones symptoms in Hindi)

ऐसे तो पित्ताशय की पथरी निर्माण होने पर कई रोगियों में सालों तक भी कोई परेशानी या लक्षण निर्माण न होने के कारण Gall bladder Stones का पता नहीं चलता हैं। कुछ रोगियों में तो अन्य किसी कारण से पेट की जांच करने पर पित्ताशय की पथरी का अकस्मात पता चलता हैं। कुछ लोग इसके लक्षण नजर आने पर इसे केवल अपचन या एसिडिटी से जुडी समस्या मानकर या तो मेडिकल से दवा लेते है या फिर केवल घरेलु नुस्खे आजमाते हैं।
 
पित्ताशय की पथरी के लक्षणों की जानकारी निचे दी गयी हैं :

  • पेट में ऊपर और दाहिनी बाजु (Right side) में तेज पेट दर्द होना। यह दर्द पेट से लेकर पीछे पीठ की तरफ और ऊपर कन्धों तक भी हो सकता हैं। पित्ताशय की पथरी में पथरी पित्त की नली में अटक जाने पर इस तरह का तेज दर्द होता हैं।
  • जी मचलाना (Nausea)
  • उलटी होना (vomiting)
  • पेट फूलना (Abdominal fullness)
  • अपचन (Indigestion)
  • डकार आना (Belching)
  • कब्ज (Constipation)
  • भूक न लगना (Loss of Appetite)

पित्ताशय की पथरी का निदान कैसे किया जाता हैं ? (Gall Bladder stone diagnosis in Hindi)

किसी रोगी में पेट दर्द या अपचन की समस्या होने पर पित्ताशय की पथरी का शक होने पर डॉक्टर निदान करने के लिए कई तरह की जांच करते हैं। जैसे की :

  1. रक्त परिक्षण / Blood Test: शरीर में infection या पीलिया का प्रमाण जांचने के लिए रक्त परिक्षण किया जाता हैं।
  2. सोनोग्राफी / Ultra sound: Gall bladder Stones का निदान करने के लिए रोगी की खाली पेट पेट की सोनोग्राफी की जाती है जिसमे रेडियोलाजिस्ट पथरी का निदान आसानी से कर सकता हैं।
  3. C T Scan : आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर रोगी के पेट का C T Scan जांच भी कराते हैं।
  4. MRCP : इसमें मैग्नेटिक फील्ड के सहारे से लिवर और पित्ताशय की जांच की जाती हैं।
  5. ERCP : इस जांच से पित्ताशय में पथरी है की नहीं यह एक डाई पित्ताशय में दूरबीन से छोड़कर देखा जाता हैं और अगर पित्त की नली में कोई पथरी अटकी पड़ी है तो उसे निकाला भी जाता हैं।

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पित्ताशय की पथरी होने पर रोगी को पेट में असहनीय दर्द और अपचन से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। समय पर अगर Gall bladder Stones से बचने के लिए उचित आहार, घरेलु नुस्खों और योग का सहारा लिया जाये तो रोगी इस परेशानी से बच सकता है और ऑपरेशन की परेशानी और खर्चे को भी दूर कर सकता हैं।

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पित्ताशय की पथरी का ईलाज कैसे किया जाता हैं? (Gall bladder Stones treatment in Hindi)

पित्ताशय की पथरी का समय पर उपचार न करने पर यह पित्त की नली में पथरी अटक जाने से रोगी को जानलेवा पीलिया हो सकता है और इसीलिए इसका समय पर उपचार करना बेहद जरुरी होता हैं। पित्ताशय की पथरी में दो तरह से उपचार किया जा सकता हैं :

  • शल्य क्रिया (Surgery) : पित्ताशय की पथरी के अधिकतर मरीजो को ऑपरेशन करने की सलाह दी जाती हैं। यह आपरेशन दो तरह से किया जाता हैं :
  1. सामान्य ऑपरेशन (Open Cholecystectomy): इसमें रोगी के पेट पर बड़ा चीरा मारकर पित्ताशय को निकाल दिया जाता हैं। इसमें रोगी को हॉस्पिटल में 3 से 4 दिन तक रुकना पड़ सकता हैं।
  2. दूरबीन ऑपरेशन (Laparoscopic Cholecystectomy): Gall bladder Stones में यह सर्जरी अधिक की जाती हैं। इसमें पेट में छोटे से छेद कर दूरबीन की सहायता से पित्ताशय को निकाला जाता हैं। इसमें रोगी को हॉस्पिटल में 1 से 2 दिन तक रुकना पड़ता हैं।
  • ERCP : इसके आलावा अगर पित्त की नली में पित्ताशय की पथरी अटक जाने पर मुंह से पेट में दूरबीन डालकर ERCP प्रक्रिया से भी Gall bladder Stones निकाले जाते हैं।
  • दवा (Medicine) : अगर पित्ताशय की पथरी के रोगी में किसी वजह से ऑपरेशन करना मुमकिन नहीं है तो रोगी को पित्ताशय की पथरी को पिघलाने के लिए Ursodiol जैसी विशेष दवा दी जाती हैं। यह दवा रोगी को लंबे समय तक लेना होता हैं। इससे रोगी को कितना फायदा होंगा यह कहना भी मुश्किल होता हैं।

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पित्ताशय की पथरी का आयुर्वेदिक देसी उपचार और घरेलू नुस्खे क्या हैं? (Gall Bladder Home remedies in Hindi)

अगर आप पित्ताशय की पथरी से परेशान है और ऑपरेशन नहीं कराना चाहते है तो निचे दिए कुछ घरेलु आयुर्वेदिक देसी उपचार और घरेलु नुस्खों को अपना सकते हैं।

  • एरंडी तेल (Castor oil): एरंडी का तेल पित्ताशय की पथरी को गलाने में मदद करता हैं। दिन में दो बार पेट में ऊपर की ओर दाहिनी तरफ हलके गर्म एरंडी तेल से मालिश करने से लाभ होता हैं। मालिश धीरे से करे और खाली पेट करे।
  • हल्दी (Turmeric): ऐसे तो पित्ताशय में रोगी को हल्का पीलिया होने के कारण ज्यादातर लोग हल्दी का सेवन करने से घबराते है पर असल में आहार में हल्दी का प्रमाण बढ़ाने से पित्ताशय की पथरी गलाने में सहायता होती हैं। आप चाहे तो सुबह-शाम एक कप गर्म दूध में 1 चमच्च हल्दी का पाउडर मिलाकर भी पि सकते हैं।
  • नाशपाती (Pear): नाशपाती फल में Pectin एंजाइम होता है जो कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण कम करता हैं। आप रोजाना एक नाशपाती फल खा सकते है या फिर इसका जूस बनाकर भी पि सकते हैं।
  • मूली + शहद + निम्बू: 4 चमच्च ताजी मूली का रस + 2 चमच्च शुद्ध शहद + 1 चमच्च निम्बू के रस को मिलाकर सुबह शाम खाली पेट पिने से पित्ताशय की पथरी तेजी से घुल जाती हैं।
  • मनुक्का (Prunes) : अगर आपको डायबिटीज नहीं है तो दिन में 3 बार एक मुट्ठी मनुक्का खाने चाहिए। मनुक्का भी Gall bladder Stones को तेजी ठीक करता हैं।

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पित्ताशय की पथरी में कौन से योग करने से लाभ होता हैं ? (Yoga for Gall Bladder Stones)

पित्ताशय की पथरी से निजात पाने के लिए आपको रोजाना निचे दिए हुए योग करने चाहिए। ( योग की विधि और लाभ जानने के लिए कृपया योग के नाम के ऊपर click करे )

  1. पश्चिमोत्तानासन: यह आसन Liver और पित्ताशय की मालिश करता है और पित्त के प्रवाह को बढ़ावा देता है।
  2. भुजंगासन: यह आसन पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है और पित्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है।
  3. सर्वांगासन: यह आसन रीढ़ की हड्डी को सीधा रखता है और पित्ताशय और यकृत को उत्तेजित करता है।
  4. शलभासन: यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन में सुधार करता है।
  5. धनुरासन: यह आसन पेट और पीठ की मांसपेशियों को खींचता है और पाचन में सुधार करता है।

पित्ताशय की पथरी के रोगियों को कैसा आहार लेना चाहिए ? (Gall Bladder Stones diet in Hindi)

पित्ताशय की पथरी शरीर में कोलेस्ट्रॉल की अधिकता से निर्मित होते है इसलिए ऐसे आहार जिनसे कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, नहीं लेना चाहिए। योग्य आहार लेकर आप पित्ताशय की पथरी को बढ़ने से और नए निर्माण होने से बचा सकते हैं।

Gall Bladder Stones में क्या नहीं खाना चाहिए?

  • वसायुक्त खाद्य पदार्थ (Fatty food): वसायुक्त खाद्य पदार्थ, जैसे कि तले हुए भोजन, लाल मांस, और डेयरी उत्पाद, पित्त पथरी के हमलों को टबढ़ा कर सकते हैं।
  • उच्च वसा वाले डेयरी उत्पाद: अधिक फैट युक्त दूध, मक्खन, और पनीर जैसे उच्च वसा वाले डेयरी उत्पादों से बचें। कम वसा वाले या वसा रहित डेयरी उत्पादों का चयन करें।
  • अंडे की जर्दी: अंडे की जर्दी में बहुत अधिक वसा होती है, इसलिए उन्हें सीमित मात्रा में खाना चाहिए।
  • मसालेदार भोजन: मसालेदार भोजन पित्त पथरी के हमलों को ट्रिगर कर सकते हैं।
  • शराब: शराब पित्त पिशाशय को सिकोड़ सकती है और पित्त पथरी के हमलों को ट्रिगर कर सकती है।
  • चीनी युक्त पेय: चीनी युक्त पेय, जैसे कि सोडा और जूस, पित्त पथरी के हमलों को ट्रिगर कर सकते हैं।
  • रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, जैसे कि सफेद ब्रेड, पास्ता, और चावल, पित्त पथरी के हमलों को ट्रिगर कर सकते हैं।

Gall Bladder Stones में क्या खाना चाहिए?

  • फल और सब्जियां: फल और सब्जियां फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर होती हैं जो पित्त पिशाशय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। विशेष रूप से, सेब, नाशपाती, खरबूजे, केले, ब्रोकली, गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां, और बीट्स पित्त पथरी के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
  • साबुत अनाज: साबुत अनाज फाइबर का एक अच्छा स्रोत है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और पित्त पथरी को रोकने में मदद करता है। ओट्स, जौ, ब्राउन राइस, और क्विनोआ जैसे साबुत अनाज को अपने आहार में शामिल करें।
  • दालें और बीज: दालें और बीज प्रोटीन, फाइबर और स्वस्थ वसा का एक अच्छा स्रोत हैं, जो पित्त पिशाशय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। मसूर, छोले, राजमा, चना, अलसी, और तिल जैसे दालें और बीज खाएं।
  • स्वस्थ वसा: स्वस्थ वसा पित्त पिशाशय को खाली करने में मदद करती हैं और पित्त पथरी के बनने का खतरा कम करती हैं। जैतून का तेल, नट्स, बीज, और एवोकैडो जैसे स्वस्थ वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
  • पानी: पर्याप्त पानी पीना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पित्त पिशाशय को पतला रखने और पथरी बनने से रोकने में मदद करता है। दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने का लक्ष्य रखें।

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पित्ताशय की पथरी से बचने के क्या उपाय हैं?

Gall Bladder Stones से निजात पाने के लिए और इससे बचने के लिए आपको इन बातों का भी ख्याल रखना चाहिए :

  • रोजाना व्यायाम करना चाहिए
  • शराब या धूम्रपान नहीं करना चाहिए
  • नियमित योग करे
  • अगर आपका वजन ज्यादा है तो इसे कण्ट्रोल करे – वजन कम करने के आसान उपाय
  • डॉक्टर की सलाह से लंबे समय तक कोई हॉर्मोन की दवा नहीं खाना चाहिए
  • मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड वसा, जैसे कि जैतून का तेल, नट्स और बीज, पित्ताशय की पथरी के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • फल, सब्जियां और साबुत अनाज फाइबर के अच्छे स्रोत हैं, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और पित्त पथरी को रोकने में मदद करते हैं।
  • रोजाना तय समय पर भोजन करे और लंबे समय तक भूखे पेट न रहे
  • अगर आपके परिवार में किसी को पित्ताशय की पथरी की तकलीफ है तो आप भी हर वर्ष अपने पेट की सोनोग्राफी कराते रहे।

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