TDS of Drinking Water: पीने के पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए?

tds of drinking water in Hindi

कई पाठक हमें वेबसाइट पर और हमारे You Tube Channel पर RO में पिने के पानी का टीडीएस (TDS) कितना होना चाहिए, इसका क्या महत्त्व है, पानी के टीडीएस के क्या फायदे और नुकसान है यह बार बार सवाल पूछते है। आज के इस लेख में हम आपको पानी के टीडीएस से जुड़े इन सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने जा रहे हैं।

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पानी का टीडीएस क्या होता हैं? (What is TDS of water in Hindi)

पानी का TDS का full form है Total Dissolved Solids, जिसे हिंदी में कुल घुलित ठोस भी कहा जाता है, पानी में मौजूद सभी अकार्बनिक और कार्बनिक पदार्थों का माप होता है। इन पदार्थों में खनिज (minerals), लवण (salts), धातुएं (metals) और अन्य अशुद्धियां शामिल हैं जो पानी में घुल सकती हैं। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, सल्फेट और कार्बोनेट जैसे तत्व शामिल हैं। TDS को मिलीग्राम प्रति लीटर (mg/L) या भागों प्रति मिलियन (ppm) में मापा जाता है।

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पीने के पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए? (What is the ideal TDS of drinking water in Hindi)

पिने के पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं:

  • भारतीय मानक ब्यूरो (BIS): BIS 10500:1984 (पानी पीने का – विशिष्टता) के अनुसार, पीने योग्य पानी में TDS का अधिकतम स्वीकार्य स्तर 500 mg/L है।
  • विश्व स्वास्थ्य संघटन (WHO): WHO दिशानिर्देशों में 300 mg/L को पीने के पानी के लिए TDS का अधिकतम स्वीकार्य स्तर निर्धारित किया गया है।
  • डॉक्टर्स की राय: एक्सपर्ट्स का कहना है कि पानी का टीडीएस अगर 500 से नीचे है, तो वह पीने योग्य है। पर इससे ज्यादा टीडीएस वाला पानी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। TDS पानी के स्वाद को प्रभावित करता है। कम TDS वाला पानी फीका लग सकता है, जबकि उच्च TDS वाला पानी खारा या धातु जैसा लग सकता है। आपको पिने के लिए 200 से 300 TDS के बिच का पानी इस्तेमाल करना चाहिए।

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ज्यादा टीडीएस वाला पानी पीने के नुकसान क्या है? (What are the side effects of drinking high TDS water in Hindi)

500 mg/L ज्यादा टीडीएस वाला पानी पीने से निचे दिए हुए नुकसान होते हैं, जैसे की:

  • निर्जलीकरण (Dehydration): उच्च TDS वाला पानी शरीर से तरल पदार्थों को तेजी से बाहर निकाल सकता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
  • पाचन संबंधी समस्याएं (Digestion): ज्यादा टीडीएस वाला पानी पीने से दस्त, मतली और उल्टी की समस्या निर्माण हो सकती हैं।
  • किडनी की पथरी (Kidney Stone): उच्च TDS वाले पानी में मौजूद खनिज, जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम, किडनी की पथरी बनने का खतरा बढ़ा सकते हैं।
  • हृदय रोग और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure): उच्च TDS वाले पानी में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है, जिससे हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है।
  • कैंसर (Cancer): कुछ अध्ययनों से पता चला है कि उच्च TDS वाले पानी में मौजूद कुछ केमिकल कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
  • स्वाद (Taste): उच्च TDS वाला पानी खारा या धातु जैसा लग सकता है, जिससे इसे पीना मुश्किल हो सकता है।
  • पौधों को नुकसान (Trees): उच्च TDS वाला पानी पौधों के लिए हानिकारक हो सकता है, जिससे उनकी वृद्धि और विकास में बाधा आ सकती है।

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कम टीडीएस वाला पानी पीने के नुकसान क्या है? (What are the side effects of drinking Low TDS water in Hindi)

100 mg/L से कम टीडीएस वाला पानी पीने से निचे दिए हुए नुकसान होते हैं, जैसे की:

  • आवश्यक खनिजों की कमी (Mineral deficiency): पानी में घुलित खनिज, जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, और सोडियम, शरीर के लिए आवश्यक हैं। बहुत कम TDS वाले पानी में इन खनिजों की मात्रा कम हो सकती है, जिससे उनकी कमी हो सकती है। कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, सोडियम तंत्रिका कार्य और मांसपेशियों के संकुचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • स्वाद में बदलाव (Taste): 100 mg/L से कम TDS वाला पानी फीका या स्वादहीन लग सकता है। यह कुछ लोगों के लिए अप्रिय हो सकता है।
  • पाचन संबंधी समस्याएं (Digestion): कुछ अध्ययनों से पता चला है कि बहुत कम TDS वाले पानी का सेवन पाचन संबंधी समस्याओं, जैसे दस्त और पेट में दर्द से जुड़ा हो सकता है।

कृपया ध्यान दे:

  • पानी में खनिज और लवण आदि का प्रमाण बेहद कम होता है और अगर आप अच्छी मात्रा में हरी सब्जिया और फल का सेवन करते है तो उनसे इन सभी की आवश्यक पूर्ति हो जाती है, जिस कारन कम टीडीएस का पानी पिने से भी आपको नुकसान नहीं होता हैं।
  • हालांकि, कुछ लोगों को, विशेष रूप से जो पहले से ही खनिजों की कमी से पीड़ित हैं, उन्हें कम TDS वाले पानी के सेवन से ऊपर बताये हुए दुष्परिणाम हो सकते हैं।

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पानी का टीडीएस कैसे पता करे? (How to check TDS of water in Hindi)

पानी का टीडीएस हम दो प्रकार से पता कर सकते हैं, TDS Meter और लेबोरेटरी जांच द्वारा परिक्षण कर।

TDS Meter द्वारा पानी का टीडीएस की जांच कैसे करे?

  • TDS मीटर एक पोर्टेबल उपकरण है जो पानी में TDS स्तर को मापता है।
  • ये मीटर आसानी से ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर पर उपलब्ध हैं।
  • TDS मीटर का उपयोग करना आसान है, बस मीटर को पानी में डुबोएं, कुछ सेकंड प्रतीक्षा करें और स्क्रीन पर TDS स्तर का रीडिंग देखें।
  • इस प्रकार आप आसानी से घर पर टीडीएस मीटर से घर के पानी का टीडीएस कितना है यह चेक कर सकते हैं।

प्रयोगशाला परीक्षण द्वारा पानी का टीडीएस कैसे पता करे?

  • आप किसी Certified Laboratory में पानी का नमूना भेजकर भी TDS का परीक्षण करवा सकते हैं।
  • यह विधि अधिक सटीक हो सकती है, लेकिन यह TDS मीटर का उपयोग करने की तुलना में अधिक महंगी और समय लेने वाली भी होती है।

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टीडीएस कम करने के उपाय क्या हैं?

टीडीएस कम करने के कुछ उपाय:

  1. रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) सिस्टम: आप अपने घर पर RO Machine लगा सकते हैं। यह 90-99% TDS तक कम कर सकता है।
  2. फ़िल्टर: बाजार में कई फ़िल्टर उपलब्ध है को TDS को घटा सकते हैं। यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध है पर RO सिस्टम जितना प्रभावी नहीं है।
  3. पानी को उबालना: पानी को उबलने से कुछ TDS कम होता है लेकिन सभी नहीं होते हैं। यह सबसे सस्ता और आसान तरीका पर इतना असरदार नहीं हैं।
  4. अन्य घरेलू उपाय:
  • नींबू या नींबू का रस: पानी में एसिडिटी बढ़ा सकता है, जो कुछ खनिजों को घुलनशील बना सकता है और उन्हें हटाने में मदद कर सकता है।
  • लकड़ी का चारकोल: पानी में मौजूद अशुद्धियों को सोखने में मदद कर सकता है।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि TDS पानी की गुणवत्ता का एकमात्र माप नहीं है। आपको जहां संभव हो, कम TDS वाले पानी का स्रोत चुनें। पानी को बोतलबंद या पैकेज्ड खरीदते समय TDS स्तर की जांच करें और मुमकिन हो तो अपने घर या व्यवसाय में वाटर सॉफ्टनर सिस्टम लगाए।

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