पीतल के बर्तन में खाना बनाने और खाने के फायदे और नुकसान | Pital ke Bartan

pital ke bartan me khana khane ke fayde kya hai

भारत में सदियों से पीतल के बर्तन (Pital ke bartan) का उपयोग खाना पकाने के लिए और खाना खाने के लिए किया जाता रहा हैं। पिछले 50 वर्षों में पीतल के बर्तन की जगह स्टेनलेस स्टील और एल्युमीनियम के बर्तनो ने ली हैं। अब फिरसे पीतल के बर्तनों के फायदे को देखकर इनका उपयोग करने का ट्रेंड बढ़ रहा हैं।

पीतल क्या हैं ?

पीतल एक मिश्र धातु है जो तांबे (Copper) और जस्ता (Zinc) के मिश्रण से बनती है। यह तांबे के रंग (पीलापन लिए सफेद) से थोड़ा गहरा होता है। पीतल में तांबे की मात्रा 55% से 95% तक हो सकती है, और जस्ता की मात्रा 5% से 45% तक हो सकती हैं। अंग्रेजी में पीतल को Brass कहा जाता हैं।

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पीतल कैसे बनता है?

पीतल बनाने के लिए, तांबे और जस्ता को एक निश्चित अनुपात में पिघलाया जाता है। पिघले हुए धातु को ठंडा होने दिया जाता है, जिसके बाद इसे ठोस रूप में ढाला जाता है। पीतल के बर्तन या अन्य वस्तुओं को चमकाने और उन्हें एक चिकनी सतह देने के लिए पॉलिश किया जाता है।

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पीतल के प्रकार कितने हैं?

पीतल विभिन्न प्रकारों में उपलब्ध है, जो तांबे और जस्ता के अनुपात पर निर्भर करता है। कुछ सामान्य प्रकार के पीतल में शामिल हैं:

  1. साधारण पीतल: इसमें 60% तांबा और 40% जस्ता होता है।
  2. लाल पीतल: इसमें 85% तांबा और 15% जस्ता होता है।
  3. सफेद पीतल: इसमें 55% तांबा और 45% जस्ता होता है।

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पीतल के बर्तन में खाना पकाने और खाने के फायदे क्या है ?

पीतल के बर्तन में खाना पकाने और खाने के कई फायदे है जिनकी जानकारी नीचे दी गयी हैं:

  1. पाचन क्रिया में सुधार (Digestion): पीतल में मौजूद तांबे और जस्ता पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। तांबा एंजाइमों के उत्पादन को बढ़ाता है जो भोजन को तोड़ने में मदद करते हैं। जस्ता पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और दस्त और कब्ज जैसी समस्याओं को रोकता है।
  2. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि (Immunity): पीतल में मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण बैक्टीरिया को पनपने से रोकते हैं। यह इन्फेक्शन के खतरे को कम करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
  3. खून की कमी से बचाव (Anemia): पीतल में मौजूद लोहा (Iron) लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। यह एनीमिया के लक्षणों को कम करने में मदद करता है, जैसे कि थकान, कमजोरी और सांस फूलना।
  4. हड्डियों को मजबूत बनाना (Bones): पीतल में मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों की बीमारियों के जोखिम को कम करता है।
  5. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद (Cosemtic): पीतल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यह झुर्रियों (wrinkles) और बारीक रेखाओं को कम करने में मदद करता है।
  6. मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद (Mental Health): पीतल में मौजूद जस्ता मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। यह याददाश्त और एकाग्रता में सुधार करने में मदद करता है।
  7. कफ विकार: आयुर्वेद के अनुसार पीतल के बर्तन में रात भर रखा पानी सुबह खाली पेट पीने से वात, पित्त और कफ यह त्रिदोष नियंत्रण में रहते है और कफ विकार काबू में रहते हैं।

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पीतल के बर्तन में खाने के नुकसान क्या हैं ?

पीतल के बर्तन में खाना पकाने और खाना खाते समय कुछ सावधानी बरतने की जरुरत है अन्यथा इसके दुष्परिणाम और नुकसान हो सकते है, जैसे की:

  1. अम्ल आहार (Acidic Food): अधिक उपयोग करने पर पीतल के बर्तनों पर एक ऑक्साइड की परत या layer निर्माण हो जाती है को टमाटर, निम्बू और विनेगर जैसे अम्ल आहार में घुल जाती हैं। इसलिए पीतल के बर्तनो में अम्ल आहार अधिक नहीं पकाना चाहिए। इससे बचने के लिए तीन की कोटिंग वाले पीतल के बर्तन का उपयोग करना चाहिए।
  2. बैक्टीरिया (Bacteria): समय के साथ पिताक के बर्तन ऑक्सीजन के साथ रिएक्शन से काले पड़ जाते हैं और इस पर बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। पीतल के बर्तनो को नमक और निम्बू से सफाई करने पर यह चमकदार बने रहते हैं।
  3. विटामिन (Vitamins): पीतल के बर्तन में खाना पकाने से विटामिन सी और विटामिन बी12 कम होने का खतरा रहता हैं।
  4. एलर्जी (Allergy): कुछ लोगों को पीतल से एलर्जी हो सकती है, जिससे त्वचा में जलन, खुजली, और चकत्ते हो सकते हैं।

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पीतल के बर्तन में खाने के नुकसान फायदे से ज़्यादा हैं। इसलिए, पीतल के बर्तनों में खाने से बचना ज़्यादा बेहतर है।

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