सिज़ोफ्रेनिया: कारण, लक्षण और इलाज | Schizophrenia in Hindi

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सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) यह एक मानसिक विकार (Mental Disorder) है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है। सिज़ोफ्रेनिया मे पीडित व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता हैं। ऐसे व्यक्ति के लिए रोजमर्रा के कामकाज मे हिस्सा लेना बेहद मुश्किल हो जाता हैं।

ईस लेख मे आप को यह जानकारी मिलेंगी hide

सिज़ोफ्रेनिया से जुड़ी जानकारी के अभाव मे कई पीडित व्यक्ति का लंबे समय तक निदान नहीं हो पाता है और ऐसे व्यक्ति को बेहद मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ता हैं। सिज़ोफ्रेनिया से पीडित व्यक्ति का अगर समय पर निदान हो जाए और उनका जल्द ईलाज शुरू कर दिया जाए तो ऐसे व्यक्ति मे जल्द सुधार देखा जा सकता हैं।

आज के इस मे हम सिज़ोफ्रेनिया के कारण, लक्षण, निदान और उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने जा रहे हैं।

सिज़ोफ्रेनिया का कारण क्या हैं? (Schizophrenia causes in Hindi)

सिज़ोफ्रेनिया का कोई ठोस कारण का अभी तक पता नहीं चला हैं। ऐसे कई कारण है जो किसी व्यक्ति मे सिज़ोफ्रेनिया विकसित होने को कारक हो सकते हैं, ईनकी जानकारी नीचे दी गयी हैं।

  1. Genetic या आनुवंशिक कारण: अगर आपके परिवार मे किसी व्यक्ति को सिज़ोफ्रेनिया का ईतिहास है तो आपको सिज़ोफ्रेनिया होने का खतरा बढ़ जाता हैं। यह ध्यान मे रखे की इसका मतलब यह नहीं है की परिवार के सभी सदस्यों को सिज़ोफ्रेनिया हो जाएगा।
  2. Environment या पर्यावरण: आनुवंशिक कारणों के साथ आपके पर्यावरण और जीवन के अनुभव जैसे की तनाव, भय, उदासी भरा जीवन, गरीबी, पोषण की कमी आदि कारकों से भी सिज़ोफ्रेनिया होने का खतरा बढ़ जाता हैं।
  3. Brain या मस्तिष्क का विकास: रिसर्च से यह पता चल है को सिज़ोफ्रेनिया से पीडित व्यक्ति के मस्तिष्क के कुछ विशेष हिस्सों का विकास और कार्य करने की शैली अलग होती हैं। इस विषय पर अभी रिसर्च चल रहा है और सिज़ोफ्रेनिया का निदान करने मे यह एक मदद हो सकती हैं।

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सिज़ोफ्रेनिया के लक्षण क्या हैं? (Schizophrenia Symptoms in Hindi)

सिज़ोफ्रेनिया का जल्द निदान और उपचार होने के लिए इसके लक्षणों की जानकारी होना आवश्यक हैं। आमतौर पर सिज़ोफ्रेनिया का निदान साइकोसिस (Psychosis) या मनोविकृति के की पहली घटना के बाद हो जाता हैं।सिज़ोफ्रेनिया मे 3 तरह के लक्षण मुख्यतः नजर आते हैं: मनोवैज्ञानिक, नकारात्मक और संज्ञानात्मक

अ) सिज़ोफ्रेनिया के मनोवैज्ञानिक लक्षण (Psychotic Symptoms)

  1. मतिभ्रम (Hallucinations): इसमे व्यक्ति ऐसी चीजें देखता है, सुनता है, सूंघता है, चखता है या महसूस करता है जो वास्तव में हैं ही नहीं। सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों के लिए आवाज़ सुनना आम बात है।
  2. भ्रम (Delusions): इसमे व्यक्ति को ऐसे भ्रम होने लगते है की कोई उन्हे चोट पहुचाना चाहता है या उनके खिलाफ कोई षडयंत्र रच रहा है इत्यादि।
  3. विचार (Thoughts): इसमे व्यक्ति के सोचने के तरीके असामान्य या अतार्किक होते हैं। कभी-कभी कोई व्यक्ति कोई बात कहते कहते बीच मे ही बात करना बंद कर देता है, एक विषय से दूसरे विषय पर कूद पड़ता है, या ऐसे शब्द बना लेता है जिनका कोई अर्थ नहीं होता।
  4. शारीरिक गतिविधि (Movements): इसमें व्यक्ति असामान्य शारीरक गतिविधि करता है या किसी एक गतिविधि को बार-बार दोहराता रहता हैं।

ब) सिज़ोफ्रेनिया के नकारात्मक लक्षण (Negative Symptoms)

  1. नकारात्मकता
  2. दैनिक गतिविधि मे अरुचि
  3. अकेले रहना पसंद करना या मिलजुल कर न रहना
  4. अपने भावनाओं को प्रकट न कर पाना
  5. सामान्य कार्य करने मे कठिनाई होना
  6. बातचीत बंद कर देना – Catatonia

क) सिज़ोफ्रेनिया के संज्ञानात्मक लक्षण (Congnitive Symptoms)

  1. निर्णय न ले पाना
  2. किसी जानकारी को सीखने या उपयोग मे लाने मे परेशानी होना
  3. एकाग्रता मे कमी
  4. किसी साधारण चीज को हल कर पाने मे मुश्किल होना

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सिज़ोफ्रेनिया का निदान कैसे किया जाता हैं? (Schizophrenia diagnosis in Hindi)

सिज़ोफ्रेनिया का निदान मनोचिकित्सक (Psychiatrist) द्वारा रोगी का व्यापक मूल्यांकन करने के बाद किया जाता हैं। इसमे की चरण शामिल हैं:

  1. साक्षात्कार (Interview): मनोचिकित्सक पीड़ित व्यक्ति के लक्षणों, चिकित्सा इतिहास, पारिवारिक इतिहास और किसी भी अन्य कारकों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए पीड़ित व्यक्ति के साथ साक्षात्कार या Interview लेते है जिसमे रोगी से सवाल पूछे जाते हैं इससे लक्षणों की प्रकृति और अवधि को समझने में मदद मिलती है।
  2. नैदानिक मानदंड (Diagnostic Criteria): सिज़ोफ्रेनिया का निदान Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders (DSM-5) में उल्लिखित मानदंडों पर आधारित है, जो मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए व्यापक रूप से स्वीकृत वर्गीकरण प्रणाली है। सिज़ोफ्रेनिया का निदान करने के लिए, पीड़ित व्यक्ति के 6 महीने के अवधि मे नजर आनेवाले लक्षणों को देखा जाता हैं।
  3. लक्षण मूल्यांकन (Symptoms Assessment): सिज़ोफ्रेनिया का निदान करने के पीड़ित व्यक्ति मे नजर आने वाले लक्षणों की तीव्रता और अवधि का मुलायंकन किया जाता हैं।
  4. अन्य स्थितियों को खारिज करें: मनोचिकित्सक रोगी मे नजर आने वाले लक्षण किसी अन्य कारण से तो नहीं या रहे है इसकी जांच करते है जैसे की नशा करना, कोई अन्य रोग या दवा का दुष्परिणाम आदि।
  5. पारिवारिक जानकारी: मनोचिकित्सक पीड़ित के लक्षणों संबंधी अधिक जानकारी के लिए परिवार के सदस्यों, करीबी दोस्तों या अन्य देखभाल करने वालों से जानकारी एकत्र की जा सकती है।
  6. निदान (Diagnosis): पीड़ित के लक्षणों से जुड़ी पूरी जानकारी का मूल्यांकन कर मनोचिकित्सक पीड़ित व्यक्ति को सिज़ोफ्रेनिया है या नहीं इसका निदान करते हैं।

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सिज़ोफ्रेनिया का इलाज कैसे किया जाता हैं? (Schizophrenia treatment in Hindi)

सिज़ोफ्रेनिया का इलाज करने मे औषधि चिकित्सा के साथ मानसिक और सामाजिक मदद की आवश्यकता होती हैं।

सिज़ोफ्रेनिया की औषधि चिकित्सा (Schizophrenia medicine in Hindi)

सिज़ोफ्रेनिया के मनोवैज्ञानिक लक्षणों मे कमी लाने के लिए पीड़ित को Antipsychotic medicine दी जाती है जैसे की Riseperidone, Clozapine, Olanzapine, Lurasidone, Asenapine इत्यादि। यह दवा हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह अनुसार ही लेना चाहिए। अगर यह दवा लेने के बाद मुंह सुखना, वजन बढ़ना, फिट आना, कब्ज या धुंधला दिखायी देना आदि लक्षण नजर आते है तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

अगर Antipsychotic दवा लेने के बाद भी पीड़ित को फायदा नहीं होता है तो इन दवा के साथ पीड़ित को Mood Stabilize करने के लिए Lithium, Lamotrigine, Carbamazepine या Valproic acid आदि दवा दी जाती हैं।

सिज़ोफ्रेनिया की मानसिक चिकित्सा (Schizophrenia Mental Treatment in Hindi)

सिज़ोफ्रेनिया की मानसिक चिकित्सा मे Cognitive Behavioral Therapy (CBT) की जाती है जिससे पीड़ित के लक्षणों मे कमी आती हैं, पीड़ित किसी भी समस्या से मुकाबला करने मे सक्षम बनता है और सामाजिक कौशल मे भी विकास होता हैं। सीबीटी चिकित्सक इस बात पर जोर देते हैं कि व्यक्ति के वर्तमान जीवन में क्या चल रहा है, बजाय इसके कि उनकी कठिनाइयों का कारण क्या है। इस चिकित्सा मे मुख्य रूप से जीवन से निपटने के अधिक प्रभावी तरीके विकसित करने के लिए समय पर आगे बढ़ने पर होता है।

सिज़ोफ्रेनिया मे सामाजिक मदद का महत्व

परिवार, दोस्तों और सहायता समूहों की एक मजबूत सहायता प्रणाली मिलने से सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है। पीड़ित के लक्षणों मे कमी आती है और उनका दवा पर निर्भरता कम हो जाती हैं।

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सिज़ोफ्रेनिया से जुड़े सवालों के जवाब (Schizophrenia FAQ’s in Hindi)

सिज़ोफ्रेनिया आमतौर पर किस उम्र में शुरू होता है?

सिज़ोफ्रेनिया आमतौर पर 16 से 30 की उम्र के बीच शुरू होता हैं।

क्या सिज़ोफ्रेनिया ठीक हो सकता है?

हालाँकि सिज़ोफ्रेनिया का कोई इलाज नहीं है, लेकिन औषधि चिकित्सा के साथ मानसिक और सामाजिक मदद से इसे नियंत्रित किया जा सकता हैं।

क्या सिज़ोफ्रेनिया वंशानुगत है?

सिज़ोफ्रेनिया के विकास में आनुवंशिकी एक भूमिका निभाती है, लेकिन पर्यावरणीय कारक भी योगदान करते हैं।

क्या सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोग काम कर सकते हैं?

हां, सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित कई व्यक्ति काम करने में सक्षम हैं, खासकर सही परीस्तिथि और सहायता के साथ।

मैं सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित किसी प्रियजन की मदद कैसे कर सकता हूँ?

आप उपचार के पालन को प्रोत्साहित करके, भावनात्मक समर्थन प्रदान करके और स्थिति के बारे में खुद को शिक्षित करके अपने प्रियजन का समर्थन कर सकते हैं।

क्या सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति संतुष्टिपूर्ण जीवन जी सकते हैं?

हाँ, सही उपचार, सहायता और रणनीतियों के साथ, सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति सार्थक जीवन जी सकते हैं।

सिज़ोफ्रेनिया कितना आम है?

सिज़ोफ्रेनिया वैश्विक आबादी का लगभग 1% प्रभावित करता है। यह सभी पृष्ठभूमि के लोगों में हो सकता है।

क्या सिज़ोफ्रेनिया अचानक विकसित हो सकता है?

सिज़ोफ्रेनिया आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होता है, समय के साथ लक्षण अधिक स्पष्ट हो जाते हैं।

क्या सिज़ोफ्रेनिया के सभी मामले एक जैसे होते हैं?

नहीं, सिज़ोफ्रेनिया प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग रूप से प्रकट होता है। हर रोगी मे लक्षणों की अवधि, गंभीरता अलग अलग होती हैं।

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सिज़ोफ्रेनिया एक जटिल रोग है जिसके प्रभावी प्रबंधन के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। इसके लक्षणों, उपचार विकल्पों को समझकर और अनुभवी लोगों से जानकारी प्राप्त करके, सिज़ोफ्रेनिया वाले व्यक्ति बेहतर जीवन जी सकते हैं। यदि आप या आपका कोई परिचित सिज़ोफ्रेनिया से प्रभावित है, तो पेशेवर मदद लेना और उसे सामाजिक सहायता और समर्थन देना आवश्यक हैं।

References:

  1. What is Schizophrenia: https://www.nimh.nih.gov/health/topics/schizophrenia#part_2276
  2. Medications That Treat Schizophrenia: https://www.webmd.com/schizophrenia/medicines-to-treat-schizophrenia
  3. What is Cognitive Behavioral Therapy?: https://www.apa.org/ptsd-guideline/patients-and-families/cognitive-behavioral

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