मिर्गी क्या है – कारण, लक्षण और ईलाज | Epilepsy in Hindi

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मिर्गी को मेडिकल की भाषा में एपिलेप्सी (Epilepsy) और मराठी भाषा में अपस्मार कहा जाता है। कई लोग इसे Seizure disorder या दौरा आने की बीमारी भी कहते है।

आप ने कई बार स्कूल में, रास्ते पर या फिर अपने कामकाज की जगह देखा होगा की कोई व्यक्ति को अचानक नीचे गिर जाता है और अपने हाथ-पैर को बेहद टाइट कर देता हैं। ऐसे में मुँह भी टेड़ा होकर मुँह से झाग निकलना शुरू हो जाता हैं। हम लोग पकड़कर उसे रोकने की कोशिश भी करे तो रोकना मुश्किल हो जाता हैं। ऐसा व्यक्ति अचानक फिर 5 मिनिट के भीतर सामान्य हो जाता है और उसे याद भी नहीं रहता की उसे थोड़ी देर पहले कोई दौरा भी पड़ा था।

किसी व्यक्ति को इस तरह अचानक फिट आकर मुँह से झाग आने के बीमारी को मिर्गी या Epilepsy कहा जाता हैं। मस्तिष्क के तंत्रिका प्रणाली में किसी गड़बड़ हो जाने से ऐसा होता हैं। सामान्य भाषा में कहे तो body के electric circuit में कोई गड़बड़ी होने से ऐसा होता हैं।

मिर्गी रोग के कारण, लक्षण, ईलाज और बचाव से जुडी पूरी जानकारी आज इस लेख में दी जा रही है।

मिर्गी क्या है ? (Epilepsy in Hindi)

मिर्गी यह मस्तिष्क (Brain) और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) का एक विकार है। मिर्गी लोगो में मस्तिष्क असामान्य विद्युत तरंग पैदा करता है। जिससे दौरे पड़ते है। इस दौरान झटके या फिट आते है। कुछ मामलो में सिर्फ बेहोशी आती है, असमंजस (confusion) का दौर, शुरुआती दौरा या मांसपेशी की ऐठन होती है। किसी व्यक्ति को केवल एक दौरा आया है तो उसे मिर्गी नहीं माना जा सकता है। जब कम से कम दो दौरे पड़ते है तो इसे मिर्गी कहते है।

मिर्गी के लक्षण क्या है ? (Epilepsy symptoms in Hindi)

मिर्गी में निचे दिए हुए लक्षण दिखाई देते है।
1. शरीर का संतुलन खो जाना – Body Imbalance
2. कमजोरी – Weakness
3. शरीर जकड जाना, झटके आना – seizures
4. चेहरे की मांसपेशिया खिंच जाना – facial muscle spasms
5. अनियंत्रित शारीरिक गतिविधिया – uncontrolled body movements
6. बेहोशी – unconsciousness
7. मुंह से झाग निकलना – frothing from mouth
8. आँखे ऊपर की ओर जाना – eye rolling upwards
9. जीभ या होंट कटना – tongue bite
10. मलाशय या मूत्राशय पर नियंत्रण खो जाना – loss of bowel and bladder control
11. स्मृति लोप – Memory loss
12. एक ही जगह पर टक टकी लगाकर देखते रहना – staring at one point

किन कारणों से मिर्गी के दौरे आने की संभावना बढ़ सकती है ? (Epilepsy trigger in Hindi)

कुछ खास वजह से मिर्गी के रोगी में दौरे आ सकते है। निचे दिए गए कारणों से मिर्गी के दौरे पड़ने की संभावना बढ जाती है इसलिए जरुरी है की मिर्गी के रोगी इन मिर्गी के trigger से दूर रहे :
1. डॉक्टर द्वारा दी हुई मिर्गी की दवाई लेना भूल जाना
2 . तनाव
3. अधूरी नींद
4. Caffeine लेना
5. सर्दी-खांसी या बुखार
6. तेज रोशनी
7. सर में चोट लगना
8. खून में Glucose की मात्रा कम हो जाना
9. मासिक के समय
10. कुछ दवाइयों का दुष्परिणाम जैसे की Anti-psychotic, Anti-depressant drugs

मिर्गी के निदान कैसे किया जाता है ? (Epilepsy diagnosis in Hindi)

मिर्गी के निदान करने के लिए नीचे दी हुई जाँच की जाती है :
1. E.E.G (Electroencephelography) – इसमें 1500 से 2000 रूपए खर्चा आता है।
2. C.T Scan of Brain Plain & Contrast – इसमें 5000 से 6000 रूपए खर्चा आता है।
3. MRI BRAIN – Epilepsy Protocol – इसमें 8000 से 10000 रूपए खर्चा आता है।

EEG जांच क्या है ?

EEG जाँच को Electroencephelography भी कहा जाता है। इस जाँच में रोगी के सिर पर कई wire लगाए जाते है और उनका reading एक machine में लिया जाता है। इसमें brain की electrical activity देखि जाती है और डॉक्टर रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी पाए जाने पर मिर्गी का निदान करते है।

मिर्गी का ईलाज कैसे किया जाता है ? (Epilepsy treatment in Hindi)

मिर्गी के ईलाज की जानकारी नीचे दी गयी है।
1. दौरा विरोधी दवा (Anti Epileptic Medicine) : मिर्गी के रोगी को लक्षणों के अनुसार दवा दी जाती है। मिर्गी के रोगी को दौरा न पड़े इसलिए दौरा विरोधी दवा जैसे की Valporin, Epsolin, Carbamazepine, Clonazepan, Diazepam आदि 1 से 2 साल तक नियमित लेने के लिए दी जाती है। अगर रोगी को 1 साल तक कोई मिर्गी का दौरा नहीं आता है तो धीरे धीरे दवा की मात्रा को कम कर बंद कर दिया जाता है। मिर्गी के रोगी को रात में दौरा न पड़े इसलिए कभी कभी नींद की गोली देने की आवश्यकता भी पड़ती है।
2. ऑपरेशन (Surgery) : अगर दवा लेने के बाद भी मिर्गी के रोगी को मिर्गी के दौरे से राहत नहीं मिलती है तो brain का वह हिस्सा जहाँ से अनियमित विद्युत् प्रवाह के कारण बार बार मिर्गी के दौरे आ रहे है उस हिस्से को ऑपरेशन कर निकाल दिया जाता है।

मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या करे ?

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यदि आपके आस-पास किसी को मिर्गी का दौरा पड़े, तो निम्नलिखित बातो का ध्यान रखे :
1. शांत रहे 
2. पीड़ित को न हिलाए 
3. चोट पहुचा सकने वाले सामान आस-पास से हटा दे, ताकि पीड़ित के गिर जाने पर कोई चोट न लगे। जैसे की टेबल,खुर्ची,चाकू 
4. पीड़ित व्यक्ति को हटाकर दूसरी जगह पर न ले जाए 
5. पीड़ित व्यक्ति को एक (दाई या बाई) ओर घुमाए ताकि उसके मुंह में कोई द्रव हो तो वह सुरक्षित तरीके से बहार निकल जाए 
6. जबरन मरीज का मुंह खोलकर उसमे कुछ डालने की कोशिश न करे 
7. मरीज के गले के पास के और अन्य तंग कपड़ो को ढीला कर दे 
8. मरीज को दौरे के दरम्यान जबरन पकड़कर रखने की कोशिश न करे 
9. मरीज के आस-पास लोग जमा न होने दे
10. मरीज को जूता,प्याज या अन्य कोई तीव्र गंध सुगाने की कोशिश न करे 
11. आपको यह ध्यान रखना चाहिए की अधिकांश दौरे जीवन के लिए घातक नहीं होते
12. मरीज का दौरा 5 से 10 मिनिट तक न रहे तो, आपको डॉक्टर या एम्बुलेंस बुलाने की जरुरत नहीं है 
13. दौरा ख़त्म हो जाने पर मरीज को देखे की उसमे असमंजस के लक्षण तो नहीं है 
14. मरीज चाहे तो उसे सोने दे या आराम करने दे 
15. अगर मिर्गी का दौरा 15 मिनिट में भी शांत न हो तो डॉक्टर या एम्बुलेंस को फोन करे।

मिर्गी के दौरे से बचने के लिए क्या करे ?

मिर्गी के रोगी को बार-बार मिर्गी का दौरा न आने के लिए निम्नलिखित बातो का ख्याल रखे :
1. नियमित रूप से डॉक्टर द्वारा लिखित मिर्गी की दवाई लेना चाहिए
2. पर्याप्त मात्रा में नींद लेना चाहिए
3. योगा और ध्यान करना चाहिए जिससे मन शांत रहे
4. दारू, सिगरेट, बीडी, तम्बाखू और गुटखा इनका सेवन न करे

मिर्गी का ईलाज कहाँ होता हैं ?

मिर्गी का ईलाज करने के लिए आप किसी भी MD Medicine Doctor या Neurophysician को दिखा सकते है। अगर आप आयुर्वेदिक ईलाज लेना चाहते है तो किसी बड़े आयुर्वेदिक हॉस्पिटल या MD Ayurveda डॉक्टर से मिले।

मिर्गी का दौरा आने वाला है यह कैसे पहचाने ?

मिर्गी का दौरा आने से पहले हमें कुछ लक्षण नजर आते है। इसके लिए जरुरी है की आपको मिर्गी के दौरे की पूरी जानकारी हो।

मिर्गी का दौरा आने के प्रमुख 3 अवस्था है।

1. शुरूआती अवस्था (Beginning) – इस अवस्था में 2 घटना होती है।
Prodrome Stage : इस अवस्था में कुछ रोगियों को कुछ घंटो या दिन पहले से यह पता चल जाता है की उन्हें मिर्गी का दौरा आनेवाला है। इस अवस्था में यह लक्षण नजर आते है : a) चिंता होना
b) स्वभाव में बदलाव
c) सर हल्का महसूस होना
d) नींद में कमी
e) एकाग्रता में कमी
Aura : सामान्यतः यह मिर्गी का दौरा आने की प्रथम अवस्था मानी जाती है। इसके लक्षण है :
a) ऐसा लगना कि कुछ पहले हुआ है जब वास्तव में ऐसा नहीं हुआ है
b) ऐसा लगना कि आप कुछ ऐसा देख रहे हैं जिसे आप पहली बार अच्छी तरह जानते हैं
c) अजीब सी गंध, आवाज या स्वाद आना
d) चक्कर आना
e) साफ़ दिखाई न देना
f) शरीर के कुछ हिस्सों में सुन्नपन
g) जी मिचलाना
h) सिर दर्द
e) घबराहट होना
f) डर लगना
कुछ लोगों में यह अवस्था आकर मिर्गी का दौरा नहीं आता है तो कुछ लोगों में बिना इस अवस्था के भी मिर्गी का दौरा आ सकता है।

2. मध्यम अवस्था (Ictal phase) : यह मिर्गी का दौरा शुरू होने से दौरा ख़त्म होने तक की अवस्था है। इसके लक्षण है :
a) भ्रम की स्तिथि
b) याददाश्त कमजोर होना
c) उलझन में पड़ना
d) सुनने में कठिनाई
e) अजीब गंध, आवाज या स्वाद
f) बोलने में कठिनायी होना
g) मांसपेशियों पर नियंत्रण न रहना
h) बार-बार हिलना-डुलना
i) जीभ या होंठ कट जाना
j) शरीर में ऐंठन
k) ह्रदय की गति का बढ़ना
l) साँस लेने में तकलीफ़

3. अंतिम अवस्था (Post Ictal phase) : यह दौरा शांत होने के बाद की अवस्था है। इसके लक्षण है :
a) भ्रम की स्तिथि
b) कमजोर याददाश्त
c) सरदर्द
d) कमजोरी
e) डर लगना
f) जी मचलाना
h) स्नायु में दर्द
i) शर्म महसूस होना

कुछ रोगी को मिर्गी का दौरा आया है यह याद रहता है तो कुछ रोगी को कुछ हुआ है इसका एहसास भी नहीं होता है।

Source – Epilepsy Foundation

मिर्गी में कौन सा योग करना चाहिए ? (Best Yoga for Epilepsy in Hindi)

मिर्गी के रोगी नियमित योग अभ्यास कर मिर्गी के दौरे आने का प्रमाण कम कर सकते है। मिर्गी के रोगी के लिए नीचे दिए हुए योग उपयोगी है :
1. सर्वांगासन
2. शवासन
3. हलासन
4. पश्चिमोत्तानासन
5. वृक्षासन
6. अनुलोम विलोम प्राणायाम
यह सभी योग और प्राणायाम करने से हमारे मस्तिष्क को blood circulation बेहतर ढंग से होता है, मस्तिष्क के कार्य में भी सुधर होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इन सभी योग की विधि, फायदे और सावधानी की जानकारी इनके नाम पर click कर आप इसी वेबसाइट पर पढ़ सकते है।

जरूर पढ़े – मिर्गी से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब

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