लेप्टोस्पायरोसिस क्या है : कारण, लक्षण और ईलाज | Leptospirosis in Hindi

leptospirosis causes symptoms treatment in Hindi

लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) यह एक जानलेवा संक्रामक रोग है जो की बारिश के दोनों मे अधिक फैलता है। भारत मे हर वर्ष हजारों लोग इस रोग के कारण अपनी जान गवाते है।

आज ईस लेख मे हम लेप्टोस्पायरोसिस का कारण, लक्षण, ईलाज और बचने के उपाय की जानकारी देने जा रहे है।

लेप्टोस्पायरोसिस क्या है? (Leptospirosis in Hindi)

Leptospirosis यह एक संक्रामक रोग है जो की Leptospiro नामक जीवाणु से होता है। यह रोग संक्रमित चूहा, एक काला सफ़ेद अमेरिकी जानवर (Skunk), लोमड़ी, गाय, घोडा, सूअर, कुत्ता इत्यादी प्राणियों के मल मूत्र से फैलता है।

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लेप्टोस्पायरोसिस कैसे फैलता है? (Leptospirosis spread in Hindi)

  • लेप्टोस्पायरोसिस रोग संक्रमित जानवर के मल और मूत्र से फैलता है।
  • यह संक्रमित जानवर के लार (Saliva) से नहीं फैलता है।
  • वर्षा ऋतु में जब तेज बारीश होती है तब प्राणियों के मल मूत्र में उपस्थित यह जीवाणु बारिश के पानी के साथ कीचड़ और मिट्टी में घुल जाता है।
  • यह जीवाणु मानव शरीर में प्रवेश किसी चोट द्वारा, सक्रमित खाना खाने से, संक्रमित पानी पीने से और आँखे, नाक, मुंह और साइनस के त्वचा का संक्रमित जल या मिट्टी के संपर्क में आने से हो सकता है।

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लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण क्या हैं? (Leptospirosis symptoms in Hindi)

Leptospirosis रोग संक्रमन होने के 2 से 25 दिनों के भीतर शरीर में फैलता है। इस रोग के मुख्य 2 अवस्था है:

प्रथम अवस्था (First Phase) 

प्रथम अवस्था में फ्लू समान लक्षण दिखाई देते है। जैसे की –

  • सरदर्द 
  • स्नायु में दर्द खास कर पैरो में 
  • आँखों में दर्द होना 
  • आँखे लाल होना 
  • ठंडी लग कर तेज बुखार आना 
  • नाक और आँख में से पानी आना

यह सभी लक्षण 5 या 9 वे दिन से ठीक हो जाते है।

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दूसरी अवस्था (Second Phase)

प्रथम अवस्था के लक्षण ठीक हो जाने के कुछ दिनों बाद दुसरी अवस्था के लक्षण दिखाई देते है। जैसे की –

  • तेज बुखार 
  • गर्दन में दर्द और जकडन  
  • पेट के दायी और उपरी हिस्से में तेज दर्द 
  • जुलाब 
  • उलटी 
  • शरीर की नसों में दर्द और जकडन 

इस बीमारी का असर जब Liver और Kidney पर होता है तब आँखों में पीलापन दिखाना शुरू हो जाता है इसे Weil’s Syndrome भी कहा जाता है।

लेप्टोस्पायरोसिस का निदान कैसे किया जाता है? (Leptospirosis diagnosis in Hindi)

Leptospirosis के लक्षण दिखने वाले व्यक्तियों में निदान हेतु निम्नलिखित जांच की जाती है। जैसे की –

  • खून की जांच (Blood): Leptospira Antibody Levels इस जाँच मे antibody की level IgM का पता चलता है। दो प्रकार के रक्त परीक्षण किए जा सकते हैं:
  1. माइक्रोस्कोपिक एग्लूटिनेशन टेस्ट (MAT): यह एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता लगाता है जो शरीर बैक्टीरिया से लड़ने के लिए बनाता है।
  2. ELISA (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay): यह एंटीबॉडी या बैक्टीरिया के एंटीजन की उपस्थिति का पता लगाता है।
  • मूत्र परीक्षण (Urine): मूत्र में लेप्टोस्पायरोसिस बैक्टीरिया या उसके डीएनए का पता लगाने के लिए मूत्र परीक्षण किया जा सकता है।
  • अन्य परीक्षण: कुछ मामलों में, डॉक्टर अन्य जांच का भी आदेश दे सकते हैं, जैसे कि लीवर फंक्शन टेस्ट या किडनी फंक्शन टेस्ट। 

लेप्टोस्पायरोसिस का उपचार कैसे किया जाता है? (Leptospirosis treatment in Hindi)

  • लेप्टोस्पायरोसिस का ईलाज करने के लिए Doxycycline, Ampicillin, Penicillin, Ceftriaxone आदि Antibiotic दवा का उपयोग किया जाता हैं। अगर रोग का शुरुआती दौर मे ईलाज शुरू हो जाए तो इस रोग को ठीक करना आसान है। ईलाज मे देरी होने पर रोगी की स्तिथि गंभीर हो सकती है।
  • रोगी के फेफड़ों मे संक्रमण होने पर रोगी को सांस लेने मे तकलीफ होती है और Oxygen का प्रमाण कम होने लगता है। ऐसे मे रोगी को Ventilator लगाना पड़ता है और रोगी को ठीक करना बेहद मुश्किल हो जाता है। Ventilator पर जाने के बाद बेहद रोगी ठीक होना मुश्किल होता है और रोगी की मृत्यु हो सकती है।

लेप्टोस्पायरोसिस से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?

जैसे की हम सभी जानते है,”रोकथाम इलाज से बेहतर है” और इसी लिए हम निचे दिए हुए कुछ सामान्य एहतियात बरत कर हम Leptospirosis से बच सकते है।

  • पानी से भरे हुए कीचड़ में पैर न रखे। उस जगह पर बारिश का पानी और मिटटी के साथ साथ कचरे और गन्दा पानी भी हो सकता है जिसमे Leptospira जीवाणु मौजूद हो सकता है। 
  • अगर आप को उस रस्ते से जाना अनिवार्य है तो घर पहुच कर अपने जुते-चप्पल और पैरो को अच्छे से स्वच्छ पानी से साफ़ करे। पैरो की अंगुलियों के बिच भी अच्छे से साफ़ करे। 
  • ज्यादा समय तक कीचड़ में या ठहरे पानी में खड़े न रहे। 
  • अच्छे जूतों का इस्तेमाल करे। पैरो के साथ जूतों की सफाई भी करे। बिना जूतों के सिर्फ पैरो की सफाई करने पर कोई लाभ नहीं होंगा।
  • अपने हाथ भी अच्छे से धोना चाहिए।
  • हाथ धोते समय साबुन से अच्छा झाग बनाकर १५ सेकंड तक बहते पानी में हाथ को अच्छी तरह से धोए और बाद में स्वच्छ कपडे से हाथ को अच्छी तरह से साफ़ करे। 
  • नल बंद करने के लिए उसी साफ कपडे का इस्तेमाल करे जिससे हाथ को दुबारा दूषण (Contamination) न हो।
  • अगर आप को कोई चोट या खरोच लगी हो तो उसे स्वच्छ कर अच्छे से मलम पट्टी (Dressing) करवा दे। बारिश के पानी से गिला होने पर उसे तुरंत बदल कर जखम को साफ़ करे और नई मलम पट्टी करे।
  • अगर आपने Pedicure / पैरो की सफाई कराई है तो बारिश से बच कर रहे। 
  • वर्षा ऋतु में हाथ और पैरो के नाखू छोटे रखे और उनकी नियमित सफाई करे। लम्बे नाखुनो के बिच में मैल जमा हो जाता है जो की खाना खाते वक्त खाने के साथ हमारे पेट में जाकर कई बिमारीया उत्पन्न कर सकता है। 
  • सर्दी-खांसी-बुखार को हलके में न ले। कोई भी Leptospirosis के लक्षण दिखने पर अपने डॉक्टर से तुरंत जांच करवाना चाहिए।  

लेप्टोस्पायरोसिस से जुड़े सवालों के जवाब

लेप्टोस्पायरोसिस होने का खतरा किसे ज्यादा होता है ?

पशुचिकित्सक, पालतू पशु के विक्रेता, सफाई कर्मचारी और खेतो में काम करने वाले किसान और मजदूरो में यह रोग होने की आशंका ज्यादा होने से बारिश के मौसम में इन्होनें विशेष ध्यान रखना चाहिए।

क्या सूखी खांसी लेप्टोस्पायरोसिस का लक्षण है?

लेप्टोस्पायरोसिस में कुछ रोगी को दूसरे हफ्तों में सुखी खांसी आ सकती हैं पर अगर आपको लगातार सुखी खांसी और बुखार है तो डॉक्टर से मिलकर जांच अवश्य कराए।

मनुष्यों के लिए कोई लेप्टोस्पायरोसिस टीका क्यों नहीं है?

लेप्टोस्पायरोसिस कई प्रकार के बैक्टीरिया के कारण होता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशिष्ट स्ट्रेन होता है। प्रत्येक स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी होने के लिए एक टीके को कई अलग-अलग एंटीजन शामिल करने की आवश्यकता होगी। साथ ही कुछ अध्ययनों से पता चला है कि जानवरों में लेप्टोस्पायरोसिस टीके बीमारी को पूरी तरह से रोकने में प्रभावी नहीं हैं।

लेप्टो वैक्सीन क्या है?

लेप्टो वैक्सीन एक टीका है जो जानवरों को लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी से बचाने में मदद करता है। लेप्टो वैक्सीन में निष्क्रिय या कमजोर लेप्टोस्पायरोसिस बैक्टीरिया होते हैं। जब किसी जानवर को वैक्सीन लगाया जाता है, तो उसका शरीर इन बैक्टीरिया के खिलाफ एंटीबॉडी निर्माण करता है।

क्या बिल्लियों को लेप्टोस्पायरोसिस होता है?

हाँ, बिल्लियों को लेप्टोस्पायरोसिस हो सकता है, हालांकि यह कुत्तों की तुलना में उनमें कम आम है।

लेप्टो मिट्टी में कितने समय तक रहता है?

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि बैक्टीरिया 13 महीने तक मिट्टी में जीवित रह सकते हैं, जबकि अन्य अध्ययनों में पाया गया है कि वे 2 साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं।

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ध्यान रहे, Leptospirosis यह  सामान्य रोग है जो शुरुआती दौर में आसानी से ठीक हो सकता है। उपचार में विलम्ब होने पर यह रोग जानलेवा साबित हो सकता है।

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अगर आपका लेप्टोस्पायरोसिस रोग से जुड़ा कोई सवाल है जिसका जवाब आपको इस लेख मे नहीं मिल है तो कृपया नीचे comment box मे या Contact us page पर आप मुझे पूछ सकते है। मैं जल्द से जल्द आपके हर सवाल का जवाब देने की कोशिश करूंगा।

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