IVF और Test Tube Baby की पूरी जानकारी

IVF का full form हैं In Vitro Fertilization, सामान्य भाषा में इसे Test Tube Baby के नाम से भी जाना जाता हैं। निःसंतान लोगों के लिए यह प्रक्रिया वरदान साबित हो रही हैं। जो पति-पत्नी किसी कारणवश संतान के सुख का  आनंद नहीं ले पाते है या जो महिलाए गर्भावस्था का अनुभव नहीं ले सकती थी वह अब IVF की वजह से इस सुख की प्राप्ति कर सकते हैं।

आधुनिक जीवन की तनाव भरी जीवनशैली, शादी की बढ़ती उम्र, प्रदुषण, बिगड़ी हुई खान पान की आदतें आदि कई कारणों से पुरुष और महिलाओं में प्रजनन क्षमता में कमी आ रही हैं। आजकल कई ऐसे मामले सामने आ रहे है जहाँ शादी के 5 से 6 साल बाद भी प्रयत्न करने के बाद भी पति-पत्नी बच्चे के सुख से वंचित हैं।

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IVF या Test Tube Baby क्या है, यह कैसे किया जाता हैं, इसमें कितना खर्चा आता हैं, इसके क्या फायदे और क्या दुष्परिणाम है ऐसे अनेक सवालों के जवाब और IVF से जुडी सारी जानकारी आज इस लेख में हम देने जा रहे हैं :

IVF or Test Tube Baby in Hindi

IVF का मतलब क्या होता हैं ? इसे Test Tube Baby क्यों कहते हैं ?

जैसे की हमने लेख के शुरुआत में ही बताया हैं, I.V.F का full form हैं In Vitro Fertilization यहाँ In का मतलब है ‘अंदर‘, Vitro (लैटिन शब्द) का अर्थ होता हैं ‘शीशे में‘ और Fertilization का मतलब होता हैं ‘गर्भाधान‘। शीशे में गर्भाधान की प्रक्रिया को IVF कहा जाता हैं। शुरुआत में कांच की ट्यूब का उपयोग किया जाता था और इसीलिए इसे Test Tube Baby भी कहा जाता हैं।

सामान्यतः गर्भावस्था में पुरुष के करोडो शुक्राणु गर्भाशय में पहुंचने के बाद केवल एक या दो सबसे स्वस्थ शुक्राणु अंडाशय में जाकर उसे गर्भाधान / Fertilize करते हैं। Ovulation होने के पश्च्यात यह एम्ब्र्यो  फॉलोपियन ट्यूब से निकलकर गर्भाशय / Uterus में आकर स्तिथ हो जाता हैं। Test Tube Baby में महिला का अंडा और पुरुष के स्वस्थ शुक्राणु को कृत्रिम तरह से एक Test Tube में fertilize किया जाता है और एम्ब्र्यो या भ्रूण तैयार होने पर महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता हैं।

Test Tube Baby की खोज Dr. Robert G Edwards ने की थी जिसके लिए उन्हें नोबल पुरस्कार भी मिल चूका हैं। Louise Brown या विश्व की प्रथम महिला है जिसने Test Tube Baby की तकनीक से 25 जुले 1978 को जन्म लिया था। भारत में डॉ सुभाष मुखर्जी ने इस तकनीक का सबसे पहले उपयोग किया था और इससे भारत में सबसे पहले दुर्गा ने 3 October 1978 को जन्म लिया था।

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In Vitro Fertilization कैसे किया जाता हैं ?

सर्वप्रथम डॉक्टर जो दंपत्ति In Vitro Fertilization द्वारा Test Tube Baby चाहते है उनका पूरा Medical check up करते हैं। महिला और पुरुष की की स्वास्थ्य जांच की जाती है और उनमे कोई खामी निकलती है जैसे की खून की कमी, शुक्राणु की कमी, PCOD, डायबिटीज, थाइरोइड की समस्या आदि तो पहले उन्ही ठीक या नियंत्रित किया जाता हैं।

  1. उत्तेजित करना / Stimulation : महिला और पुरुष पूरी तरह से ठीक होने पर IVF की तैयारी की जाती हैं। इसमें डॉक्टर महिला की पहले कई बार पेट की सोनोग्राफी कर अंडे ठीक से तैयार होते है या नहीं यह जांच करते हैं। महिला के शरीर में ज्यादा अंडे तैयार होने के लिए डॉक्टर महिला को विशेष हॉर्मोन का इंजेक्शन भी देते है। महिला के अंडाशय में अच्छे अंडे तैयार होने पर आगे की प्रक्रिया की जाती हैं। IVF में महिला को शुरुआत से आराम करने की सलाह दी जाती है। अधिक परिश्रम वाले कार्य या व्यायाम नहीं करना चाहिए।
  2. अंडा प्राप्त करना / Egg Retrieval : महिला के स्वस्थ अंडे प्राप्त करने हेतु सोनोग्राफी मशीन में देखते हुए महिला के योनि भाग से एक सुई अंदर डाली जाती है और अंडाशय में से स्वस्थ अंडे निकालकर उन्हें संग्रहित किया जाता हैं। इसमें डॉक्टर महिला को हल्का बेहोशी का इंजेक्शन भी दे सकते हैं। इसमें किसी प्रकार की कोई चीरफाड़ नहीं की जाती हैं। महिला को प्रक्रिया के बाद मामूली पेटदर्द हो सकता हैं जो दवा देने से कम हो जाता हैं। इसी तरह पुरुष के शुक्राणु संग्रहित करने के लिए पुरुष का वीर्य जमा कर मशीन की सहायता से स्वस्थ शुक्राणु अलग किये जाते हैं।
  3. वीर्यरोपण और गर्भाधान / Insemination and Fertilization : इस stage में एक test tube में महिला के store किये हुए अंडे में एक सुई द्वारा पुरुष के store किये हुए शुक्राणु को डाला जाता हैं। महिला के जितने भी अंडे store किये है उन सभी अंडो के साथ इस प्रक्रिया को किया जाता हैं जिसे insemination या वीर्यरोपण कहा जाता हैं। इसके के बाद शुक्राणु और अंडे का मिलन होकर गर्भाधान या Fertilization हो जाता हैं।
  4. गर्भ पालन / Embryo Culture : Fertilization के पश्च्यात भ्रूण को अच्छे से एक विशेष मशीन में उचित तापमान पर storage किया जाता है जहा गर्भ का विकास होना शुरू हो जाता हैं।
  5. भ्रूण गर्भाशय में स्थापित करना / Implantation : टेस्ट ट्यूब में 3 से 5 दिन भ्रूण की अच्छी देखरेख करने के बाद जिस भ्रूण की सबसे अच्छी growth हुई है और जिनमे कोई खराबी नहीं हुई है उन्हें चुना जाता है। दंपत्ति को भी सबसे बेहतरीन भ्रूण में से उनके पसंदीदा भ्रूण को चुनने के लिए कहा जाता हैं। भ्रूण का चुनाव करने के बाद इसे एक विशेष सुई की सहायता से महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता हैं। यह एक सरल प्रक्रिया है और इसके लिए महिला को बेहोश करने की जरुरत नहीं होती हैं। एक भ्रूण स्थापित करने पर कभी – कभी भ्रूण गिरने का डर रहता है इसलिए डॉक्टर 2 से 3 भ्रूण भी गर्भाशय में स्थापित कर सकते हैं। ऐसा करने से 2 या 3 बच्चे भी हो सकते हैं। बाकि बचे स्वस्थ भ्रूण को विशेष मशीन में store किया जाता है जिनका जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाता हैं।

IVF के फायदे क्या हैं ?

IVF के फायदे इस प्रकार हैं :
  1. IVF की वजह से आप एक सुरक्षित तरीके से संतान का सुख प्राप्त कर सकते हैं।
  2. IVF में आप एक ऐसे भ्रूण को चुन सकते है जो की स्वस्थ है और जिसमे कोई विकार नहीं हैं।
  3. IVF यह एक दर्दरहित प्रक्रिया है और इसके लिए कोई ओपरेशन की जरुरत नहीं होती हैं।
  4. जिन महिलाओं की रजोनिवृत्ति हो चुकी है वह महिलाए भी IVF से प्रेग्नेंट हो सकती हैं।

IVF के नुकसान क्या हैं ?

IVF के नुकसान इस प्रकार हैं :
  1. IVF के कारण कुछ महिलाओं में पेट में या छाती में पानी भरने की समस्या निर्माण हो सकती है जिसे फिर सुई की सहायता से निकालना पड़ता हैं। इसे Ovarian Hyper Stimulation Syndrome या OHSS कहा जाता हैं। इसका प्रमाण बेहद कम हैं।
  2. कुछ महिलाओं को पेट में दर्द, सिरदर्द, जी मचलाना, कब्ज और तनाव आदि समस्या भी होती हैं।
  3. IVF के कारण कुछ महिलाओं को स्तन में सूजन की दिक्क्त भी हो सकती हैं।
  4. IVF में Pre Mature Birth की संभावना भी रहती हैं।
  5. IVF में आपको एक से ज्यादा बच्चे हो सकते हैं। अगर आपको एक ही बच्चा चाहिए पर गर्भाशय में दो भ्रूण रखे है दोनों का ठीक से विकास हो गया तो आपको एक की जगह जुड़वा बच्चे हो सकते हैं।
IVF के ये कुछ दुष्परिणाम है जो की सामान्य गर्भावस्था में भी रहते है पर इनका प्रमाण बेहद कम हैं।पढ़े गर्भावस्था के पहले 3 महीनो में कैसा आहार लेना चाहिए ?

IVF से जुड़े कुछ सवालों के जवाब ?

 

IVF का सफलता दर कितना हैं ?

IVF का सफलता दर या Success ratio कई बातों पर निर्भर करता है जैसे की महिला की आयु, अन्य बीमारी होना, शारीरिक विकृति या आप किस सेंटर में IVF करा रहे है इत्यादि। सामान्यतः देखा गया है की IVF का सफलता दर 40% तक औसतन रहता है। अगर महिला की उम्र 30 वर्ष से कम है तो success rate 60% तक भी हो सकता हैं वही अगर महिला की उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो success rate 10% या इससे कम भी हो सकते हैं।

IVF में कितना खर्च आता हैं ?

IVF में कितना खर्च होगा यह भी कई बातों पर निर्भर करता है जैसे की महिला को कोई अन्य बीमारी है, पहले गर्भपात हुआ है या आप किस शहर या की हॉस्पिटल में IVF कराते है आदि। IVF में ऐसे तो कुल मिलाकर एक से दो लाख तक खर्चा होता है पर अगर कोई बड़ा शहर या बड़ा सेंटर है तो 3 से 4 लाख तक खर्च भी हो सकते हैं।

IVF में कितना समय लगता हैं ?

IVF में आपको एक बार में 15 दिन से लेकर एक महीने तक का समय लग सकता हैं। जटिलताएं होने पर अधिक समय भी लग सकता हैं। IVF में महिला के अंडे के विकास का और पुरुष के शुक्राणु का पहले अच्छे से परिक्षण किया जाता हैं इसलिए देरी लगती हैं।

IVF के विफलता के क्या कारण होते हैं ?

IVF में कई जांच, परीक्षण और अच्छी देखभाल के बाद भी विफलता हो सकती है। IVF के सफलता के कुछ कारण इस प्रकार हैं :
  1. मोटापा : अगर महिला का वजन ज्यादा है और पेट का आकार बड़ा है तो सफलता के chance थोड़े कम हो जाते हैं।
  2. उम्र : महिला की उम्र अगर 25 से 30 वर्ष के बिच है तो IVF के result बेहतर होते है वही अगर महिला की उम्र 40  वर्ष से अधिक है तो विफलता का प्रमाण अधिक होता हैं।
  3. रोग : महिला को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, TB, दमा या थाइरोइड आदि की समस्या होने पर IVF में सफलता प्रमाण कम होता हैं। अगर महिला को पहले दो-तीन बार गर्भपात हो तो IVF में मुश्किल हो सकती हैं। अगर पुरुष के शुक्राणु का प्रमाण कम है या उनकी गुणवत्ता कम है तो IVF में मुश्किल होती हैं।
  4. शारीरिक विकृति : अगर महिला की लम्बाई कम हैं, गर्भाशय छोटा है या गर्भाशय में दो भाग है तो IVF में विफलता मिल सकती हैं।
  5. व्यसन : महिला को धूम्रपान या शराब की लत हो तो IVF में सफलता मिलना बेहद मुश्किल हो जाता हैं।
  6. IVF Hospital : IVF कराने से पहले आपको ऐसे IVF सेण्टर को चुनना चाहिए जिनका सफलता दर अधिक है और जिनके पास नयी टेक्नोलॉजी उपलब्ध हैं।
यह IVF सफल ना होने के कुछ मुख्य कारण है। इनके अलावा भी कुछ कारण है जिसकी जानकारी आप अपने डॉक्टर से ले सकते हैं।

एक महिला कितने बार IVF करा सकती हैं ?

एक महिला को ऐसे तो 3 से 4 बार IVF किया जा सकता हैं पर महिला के स्वास्थ्य को ख्याल में रखते हुए 2 से अधिक बार IVF नहीं कराना बेहतर रहता हैं। जब प्रेग्नेंट होने के सारे तरीके असफल हो जाए तब ही IVF के बारे में सोचना चाहिए।

IVF के बाद महिला को क्या ख्याल रखना चाहिए और अपनी care कैसे करनी चाहिए ?

IVF सफल होने के लिए IVF के बाद महिला ने निचे दिए हुए बातों का ख्याल रखना चाहिए :

  1. आराम / Bed Rest : महिला को IVF के बाद शुरुआत में 10 से 15 दिन आराम करना चाहिए। इसके बाद महिला अपने दैनंदिन काम कर सकती है और उसे bed rest की जरुरत नहीं होती हैं। कई लोग महिला को IVF के बाद 9 महीने पुरे आराम की सलाह देते है जो की गलत हैं। महिला को bed rest तब ही करना चाहिए जब उसे डॉक्टर आराम करने की सलाह देते है। IVF गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर बढ़ने पर या रक्तस्त्राव होने पर आराम करने की सलाह दी जाती हैं।
  2. आहार / Diet : IVF के बाद महिला को पौष्टिक आहार देना चाहिए। सामान्य गर्भावस्था में महिला को जो आहार देने की सलाह दी जाती है वही आहार लेना चाहिए। पढ़े – गर्भावस्था में महिला ने कैसा आहार लेना चाहिए ?
  3. दवा / Medicine : IVF के बाद महिला ने डॉक्टर द्वारा दी हुई दवा समय पर लेना बेहद जरुरी होता हैं। यह दवा गर्भाशय की दीवार को भ्रूण / embryo को अच्छे से स्थापित करने के लिए तैयार करती है जिससे गर्भ गिरता नहीं हैं। डॉक्टर की सलाह बगैर कोई अन्य दवा या नुस्खा नहीं आजमाना चाहिए।
  4. संक्रमण / Infection : IVF में सफल होने के लिए जरुरी है की IVF के बाद आपको कोई संक्रमण नहीं होना चाहिए। इसके लिए आपको भीड़भाड़ वाली जगह, बाहर का खाना, दूषित पानी और घर में कोई बीमार है तो उनसे दूर रहना चाहिए। सर्दी, खांसी, बुखार, पेशाब में जलन आदि समस्या होने पर डॉक्टर से मिलकर तुरंत उपचार कराना चाहिए।

IVF या Test tube baby यह एक खर्चीली प्रक्रिया है और यह भी जरुरी नहीं है की इसमें पहली बार में आपको सफलता प्राप्त हो इसीलिए प्रेगनेंसी के बाकि सभी उपाय असफल होने पर आपको इसके बारे में सोचना चाहिए।

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